25 हजार छात्राओं की तकदीर संवार रहीं डॉ. प्रियंका, किशनगंज में शिक्षा से बेटियों को दे रहीं नई उड़ान, जानिए सफलता की कहानी
किशनगंज के आरके साहा महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ. कुमारी प्रियंका ने 18 वर्षों में 25,000 छात्राओं को उच्च शिक्षा ...और पढ़ें

किशनगंज के रत्न काली साहा महिला कॉलेज इंटर प्राचार्या डॉ. कुमारी प्रियंका
HighLights
डॉ. प्रियंका ने 18 वर्षों में 25,000 छात्राओं का मार्गदर्शन किया।
कॉलेज में छात्रावास, स्मार्ट क्लासरूम और खेल सुविधाएं विकसित कीं।
छात्राओं को उच्च शिक्षा, खेल, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया।
संवाद सहयोगी, किशनगंज। "शिक्षा के प्रति अपने जीवन को समर्पित करने का मूल उद्देश्य सीमांचल की महिलाओं को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि वे अपने हक, अधिकार और सम्मान के लिए स्वयं आवाज उठा सकें।
सही मायने में देखा जाए तो महिला सशक्तिकरण का प्रथम अध्याय और सबसे मजबूत स्तंभ शिक्षा ही है।" यह विचार किशनगंज के प्रसिद्ध रत्न काली साहा (आरके साहा) महिला कॉलेज की इंटर प्राचार्या डॉ. कुमारी प्रियंका ने व्यक्त किए।
किशनगंज स्थित रत्न काली साहा (RKS) महिला कॉलेज की इंटर प्राचार्या डॉ. कुमारी प्रियंका पिछले 18 वर्षों से महिला शिक्षा के लिए समर्पित
वर्ष 2008 से 2026 के दौरान कला, विज्ञान व वाणिज्य संकाय की करीब 25 हजार छात्राओं का सफलतापूर्वक कर चुकी हैं मार्गदर्शन
सत्र 2026-28 में कॉलेज में लगभग 2,000 छात्राओं का हुआ नामांकन; परिसर में छात्रावास, स्मार्ट क्लासरूम व भवन निर्माण को दी गति
छात्राओं को उच्च शिक्षा के साथ-साथ क्रिकेट, फुटबॉल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किया जा रहा है प्रोत्साहित
मनोविज्ञान विषय से स्नातकोत्तर (MA) की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने के बाद आरके साहा महिला कॉलेज में इंटर की प्राचार्या के रूप में उनकी नियुक्ति हुई थी, जिसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
25 हजार छात्राओं का संवारा भविष्य; सत्र 2026-28 में दो हजार नई बालिकाओं का नामांकन
अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक सेवाओं के बारे में बताते हुए डॉ. कुमारी प्रियंका ने कहा कि वर्ष 2008 से लेकर 2026 तक के 18 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने इंटरमीडिएट में पढ़ाई करने वाली विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय की करीब 25 हजार छात्राओं का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है।
इंटर पास करने के बाद छात्राओं को स्नातक व अन्य उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने का ही यह सकारात्मक परिणाम है कि सत्र 2026-28 में कॉलेज में लगभग दो हजार नई बालिकाओं ने इंटरमीडिएट में नामांकन करवाया है। उनके कार्यकाल के दौरान कॉलेज परिसर में नए भवन कक्षों के निर्माण से लेकर पठन-पाठन के व्यापक और आधुनिक इंतजाम किए गए हैं।
खेल के मैदान में भी बेटियां गाड़ रहीं झंडे; माता-पिता की प्रेरणा से मिला मुकाम
कॉलेज में केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि छात्राओं के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परिसर में बालिकाओं के लिए सुरक्षित छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है।
साथ ही, छात्राओं को फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों में शामिल कर उनकी खेल प्रतिभा को निधारा जा रहा है तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष मार्गदर्शन दिया जाता है।
डॉ. प्रियंका अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी माता पुष्पा रानी साहा और पिता अजीत प्रसाद को देती हैं, जिन्होंने हमेशा उनकी पढ़ाई को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि जब उनके मार्गदर्शन से कॉलेज की बालिकाएं पढ़कर अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि उनका जीवन और मेहनत पूरी तरह सार्थक हो गए हैं।
