खगड़िया की फूलगोभी से महक रही सहरसा-मधेपुरा की थाली, किसानों की मेहनत से बाजार तक पहुंच रही ताजी सब्जी
खगड़िया का दियारा क्षेत्र अब प्रमुख 'सब्जी हब' बन गया है, जहाँ 500 एकड़ में फूलगोभी की खेती किसानों की ...और पढ़ें

खगड़िया में लहलहाती फूलगोभी की खेत और तुड़ाई करते किसान।
HighLights
खगड़िया का दियारा क्षेत्र बना प्रमुख फूलगोभी उत्पादन केंद्र।
किसान 60 दिन में प्रति एकड़ 3 लाख तक कमा रहे।
मधेपुरा और सहरसा के बाजारों में खगड़िया की गोभी की धूम।
संवाद सूत्र,(खगड़िया)। खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत गंगा नदी के मुहाने पर बसे दियारा क्षेत्र कुल्हड़िया, भोरकाठ, कोलवारा और बैसा की पहचान अब प्रमुख 'सब्जी हब' के रूप में स्थापित हो चुकी है।
इस वर्ष क्षेत्र में लगभग 500 एकड़ भूमि पर फूलगोभी की व्यापक खेती की गई है। इस लहलहाती फसल ने न केवल यहां के किसानों की आर्थिकी को मजबूत संबल दिया है, बल्कि गांव की तस्वीर और किसानों की तकदीर दोनों को बदलकर रख दिया है।
तस्वीर यह है कि अल सुबह से ही दियारा की पगडंडियों पर पड़ोसी जिलों के कारोबारियों की आवाजाही शुरू हो जाती है और यहां की गोभी मधेपुरा व सहरसा के बाजारों में धूम मचा रही है।
60 दिनों की मेहनत और प्रति एकड़ 3 लाख तक की आमदनी
कुल्हड़िया के स्थानीय किसान अखिलेश कुमार ने खेती का गणित समझाते हुए बताया कि आषाढ़ माह में गोभी का बीज तैयार किया जाता है और सावन माह में पौधे खेतों में रोपे जाते हैं। मात्र 60 दिनों के भीतर गोभी की फसल पूरी तरह तैयार होकर कटने लगती है।
वहीं, भोरकाठ के किसान सूरज शर्मा और कोलवारा के जवाहर शर्मा ने बताया कि एक एकड़ खेत में गोभी लगाने में लगभग 55 से 60 हजार रुपये का कुल खर्च आता है।
यदि मौसम और बाजार ने सही साथ दिया, तो प्रति एकड़ 3 लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हो जाती है। सीजन के शुरुआती चरण में फूलगोभी व बंधगोभी 100 प्रति किलो तक बिके थे, जबकि वर्तमान में खेतों से ही 50 प्रति किलो का थोक भाव मिल रहा है।
चार बीघा में खेती करने वाले भोरकाठ के किसान शैलेश शर्मा बताते हैं कि पर्व-त्योहारों के कारण मांग में भारी उछाल है और फसल कटाई से बढ़िया मुनाफा मिल रहा है।
मधेपुरा और सहरसा के व्यापारियों की पहली पसंद बना कोलवारा
गंगा दियारा की गुणवत्तापूर्ण फूलगोभी को खरीदने के लिए दूर-दराज जिलों के व्यापारी हर सुबह यहां खिंचे चले आ रहे हैं। मधेपुरा जिले के आलमनगर के सब्जी कारोबारी मुकेश मंडल ने बताया कि वे प्रतिदिन तड़के तीन बजे बाइक से निकलते हैं और सुबह पांच बजे तक कोलवारा पहुंच जाते हैं।
यहां से 50 किलो की दर से प्रतिदिन दो से ढाई क्विंटल फूलगोभी खरीदकर आलमनगर के बाजार में 70 किलो की दर से बेचते हैं।
दूसरी ओर, सहरसा से आने वाले सब्जी व्यापारी मनीष कुमार और रमन कुमार ने बताया कि वे रोजाना पिकअप वाहन लेकर कोलवारा व कुल्हड़िया पहुंचते हैं। यहां से 10 से 15 क्विंटल फूलगोभी की खरीदारी कर सहरसा ले जाते हैं, जहां 65 से 70 प्रति किलो की दर से हाथों-हाथ पूरी खेप बिक जाती है।
सब्जी उत्पादन एवं अर्थशास्त्र का विवरण
| विवरण | तथ्यात्मक जानकारी |
| उत्पादन क्षेत्र | कुल्हड़िया, भोरकाठ, कोलवारा, बैसा (परबत्ता, खगड़िया) |
| खेती का रकबा | लगभग 500 एकड़ (गंगा दियारा इलाका) |
| लागत व मुनाफा | लागत: 55,000-60,000/एकड़ | अनुमानित आय: 3 लाख तक/एकड़ |
| फसल चक्र अवधि | 60 दिन (आषाढ़ में बिचड़ा, सावन में रोपाई) |
| खरीद व बिक्री मूल्य | खेत पर थोक भाव: 50/किग्रा | मधेपुरा-सहरसा बाजार भाव: 65-70/किग्रा |
| प्रमुख आपूर्ति बाजार | आलमनगर (मधेपुरा) एवं सहरसा मुख्य बाजार |
गंगा दियारा की उपजाऊ मिट्टी में उगाई जाने वाली यह फूलगोभी बेहद स्वादिष्ट और फ्रेश होती है। यही वजह है कि हम तड़के 3 बजे बाइक चलाकर कोलवारा आते हैं। रोज ढाई क्विंटल गोभी आलमनगर ले जाकर बेचते हैं और अच्छी रोजगारी हो जाती है।
— मुकेश मंडल, सब्जी कारोबारी (आलमनगर, मधेपुरा)
