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    बेलदौर पीएचसी में दाद-खाज की दवा भी नहीं

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 26 Oct 2021 06:41 PM (IST)

    संवाद सूत्र बेलदौर (खगड़िया) सीमावर्ती प्रखंड बेलदौर पीएचसी पर एक नगर पंचायत समेत 15 पंचायतों

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    बेलदौर पीएचसी में दाद-खाज की दवा भी नहीं

    संवाद सूत्र, बेलदौर (खगड़िया): सीमावर्ती प्रखंड बेलदौर पीएचसी पर एक नगर पंचायत समेत 15 पंचायतों की स्वास्थ्य के देखभाल का जिम्मा है। यहां सीमावर्ती मधेपुरा जिले के भी मरीज आते हैं। लेकिन पीएचसी बदहाल स्थिति में है। चिकित्सकों की कमी से लेकर अन्य साधन-सुविधा का अभाव है। दो लाख 65 हजार लोगों की स्वास्थ्य सेवा का दारोमदार

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    पीएचसी के ऊपर करीब दो लाख 65 हजार की आबादी के स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेवारी है। बेलदौर पीएचसी की स्थापना 1970 के दशक में हुई थी। आबादी बढ़ी, परंतु साधन सुविधा नहीं बढ़े। 25 किलोमीटर की दूरी तय कर आते हैं मरीज

    यहां करीब 25 किलोमीटर की दूरी तय कर भी मरीज पहुंचते हैं। काली कोसी की गोद में बसे कैंजरी पश्चिम पार एवं कोसी नदी के किनारे इतमादी पंचायत की गांधीनगर सुदूर गांव हैं। यहां के लोग नाव से नदी पार करते हैं और फिर सड़क मार्ग से पीएचसी पहुंचते हैं। चिकित्सकों की है कमी

    पीएचसी में स्वीकृत चिकित्सकों के नौ पदों के बाबत चार कार्यरत हैं। चिकित्सकों की नियुक्ति हुई थी। लेकिन एक पीजी की पढ़ाई करने गए हैं, तो एक चिकित्सक रिजाइन दे चुके हैं। नर्स की भी है कमी

    पीएचसी अंतर्गत 48 एएनएम की जरूरत है। लेकिन मात्र 23 कार्यरत हैं। कंपाउंडर और ड्रेसर की भी कमी है। 80 से 85 मरीज रोज आते हैं

    यहां मरीज बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। औसतन 80-85 मरीज आते हैं। इनमें इमरजेंसी के 10 से 15 मरीज भी शामिल हैं। सभी प्रकार की दवा नहीं

    दवा की बात करें, तो स्थिति दयनीय है। यहां दाद, खाज, खुजली आदि कि दवा नहीं है। चर्म रोग के मरीज काफी संख्या में आते हैं। उठती रही हैं आवाज

    पीएचसी की दयनीय दशा को लेकर आवाज उठती रही हैं। खासकर महिला चिकित्सक की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेता मुरारी सिंह के नेतृत्व में आंदोलन भी हो चुका है। सरकारी क्वार्टर है

    पीएचसी परिसर में सरकारी क्वार्टर बना हुआ है। जिसमें चिकित्सक रहते हैं। बीसीएम भी रहते हैं। हालांकि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी समेत अन्य कई कर्मी बाहर से आते हैं। क्या कहते हैं मरीज

    ढाढ़ी गांव की संगीता कुमारी ने बताया कि उन्हें कुत्ता काट लिया है। दूसरा डोज लेने पहुंची हूं। अस्पताल में कुत्ता काटने की दवा है। पीरनगरा गांव के नारायण पासवान ने कहा कि डाक्टर समय पर रहते हैं। मारपीट में घायल केहर मंडल टोला की तारा कुमारी ने कहा कि इलाज की ठीक व्यवस्था है। कोट

    चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मी की कमी है। जिसे लेकर बार-बार वरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उपलब्ध संसाधन में बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराए जाने का प्रयास जारी है।

    डा. सुभाष रंजन झा, पीएचसी प्रभारी।