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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 14, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अलविदा कवि किकर, आप याद आते रहेंगे

By JagranEdited By:
Published: Tue, 14 Jul 2020 07:02 PM (IST)Updated: Wed, 15 Jul 2020 06:09 AM (IST)

खगड़िया । खगड़िया के साहित्यिक आकाश का ध्रुवतारा कैलाश झा किकर के असामयिक निधन से

अलविदा कवि किकर, आप याद आते रहेंगे
अलविदा कवि किकर, आप याद आते रहेंगे

खगड़िया । खगड़िया के साहित्यिक आकाश का 'ध्रुवतारा' कैलाश झा किकर के असामयिक निधन से अंग जनपद में सन्नाटा पसर गया है। उन्होंने बहुत ही कम समय में साहित्य की दुनिया में मुकाम हासिल किया। वे कवि कैलाश झा किकर के नाम से विख्यात थे। कवि किकर की अनवरत लेखनी और साहित्यिक अभियान से फरकिया की साहित्य को एक नई पहचान मिली। उन्होंने हिदी और अंगिका में लगातार लेखन किया। मालूम हो कि सोमवार को किकर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

लेखक डॉ. अनिल ठाकुर कहते हैं- विश्वास नहीं हो रहा कवि जी (अपने लोगों के बीच इस नाम से ही विख्यात थे) नहीं रहे। उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में खगड़िया का नाम देश स्तर पर रोशन किया। किकर जी सदत लेखनरत रहे। खगड़िया में कई विराट साहित्यिक आयोजन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया।

हरिपुर से आकर अंग जनपद के साहित्यिक आकाश में छा गए कवि कैलाश झा किकर का जन्म खगड़िया के अलौली प्रखंड स्थित हरिपुर गांव में 12 जनवरी 1962 को एक साधारण परिवार में हुआ था। अपनी कठिन परिश्रम और लगन से उन्होंने एमए एवं एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर एक शिक्षक के रूप में अपनी नई जिदगी की शुरुआत की। शिक्षक की नौकरी पाने बाद वे खगड़िया में आकर रहने लगे। इसके बाद उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। कई किताबें उनकी प्रकाशित हैं।

'मास्टर के मास्टरबा कहभो, बच्चा पढ़तो कहियो ना'

वे मंच के भी सिद्धहस्त कवि थे। उनकी रचना 'मास्टर के मास्टरबा कहभो, बच्चा पढ़तो कहियो ना' लोगों की जुबान पर चढ़ गई। वे हिदी भाषा साहित्य परिषद खगड़िया के महासचिव एवं अखिल भारतीय अंगिका कला मंच खगड़िया के भी महासचिव थे। 'कौशिकी' एवं 'स्वाधीनता संदेश' पत्रिका का लगातार 19 वर्षों से संपादक रहे। उनकी

'दरकती जमीन,' 'कोई- कोई औरत,' 'चलो पाठशाला,' 'हम नदी के धार,' 'देखकर हैरान हैं सब,' ' जिदगी के रंग हैं कई,' 'ईमान बचाए रखते हैं हम' आदि किताबें प्रकाशित हैं।