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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bihar News: बिहार के इस मंदिर की अलौकिक है दास्तां, विजयादशमी पर होता है आदिवासी नृत्य; दूर-दूर से आते हैं भक्त

By Rajeev ChoudharyEdited By: Shashank Shekhar
Published: Thu, 12 Oct 2023 04:13 PM (GMT+05:30)

बिहार के कटिहार में दुर्गा माता का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर मनोकामना सिद्धि के रूप में विख्यात है। यह ...और पढ़ें

बिहार के इस मंदिर की अलौकिक है दास्तां, विजयादशमी पर होता है आदिवासी नृत्य
बिहार के इस मंदिर की अलौकिक है दास्तां, विजयादशमी पर होता है आदिवासी नृत्य

HighLights

  1. दुर्गा पूजा के विजयादशमी के दिन कलश विसर्जन किया जाता
  2. संगमरमर की प्रतिमा काशी से लाकर यहां स्थापित की गई है

संवाद सूत्र, रोशना (कटिहार)। बिहार के कटिहार में प्राणपुर प्रखंड स्थित रोशना बाजार दुर्गा मंदिर मनोकामना सिद्धि के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। अपनी अलौकिक शक्ति के लिए यह दुर्गा मंदिर जाना जाता है। किसी शुभ कार्य के लिए निकलने पर लोग इस मंदिर में मन्नत मांगने पहुंचते हैं।

कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। नवरात्रि के मौके पर बिहार एवं पश्चिम बंगाल के श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना व मन्नत मांगने पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां अपनी क्षमता के अनुरूप चढ़ावा चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी दया भूषण मिश्रा ने बताया कि इस मंदिर से लोगों की असीम श्रद्धा जुड़ी हुई है।

मंदिर की विशेषता

मंदिर में बलि देने की प्रथा नहीं रही है। नवरात्र के समय इस मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर में संगमरमर से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। संगमरमर की प्रतिमा काशी से लाकर यहां स्थापित की गई है। दुर्गा पूजा के विजयादशमी के दिन कलश विसर्जन किया जाता है।

आदिवासी नृत्य होता है आकर्षण का केंद्र

दुर्गा मंदिर के प्रांगण में विजयादशमी के दिन संथाली नृत्य का आयोजन आकर्षण का केंद्र होता है। बिहार व झारखंड से आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचते है।

क्या कहते हैं मंदिर समिति के सदस्य

मंदिर समिति के अमित साह व रवि गुप्ता ने कहा कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। रोशना बाजार का दुर्गा मंदिर मनोकामना सिद्धि के नाम से मशहूर है। विजयादशमी के दिन आयोजित होने वाले आदिवासी नृत्य को देखने दूर दूर से लोग पहुंचते हैं।

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