बालू वाली जमीन पर खेती की योजना
कटिहार [नंदन कुमार झा]। सैलाब के बाद खेतों में बालू फैलने के कारण किसान परेशान हैं।
कटिहार [नंदन कुमार झा]। सैलाब के बाद खेतों में बालू फैलने के कारण किसान परेशान हैं। फसल बर्बाद होने के साथ ही अब उन्हें खेती की ¨चता सताने लगी हैं। बालू की परत चढ़ने के कारण उपजाऊ जमीन पर लगने वाली फसल लगाना फिलहाल किसानों के लिए मुश्किल है। ऐसे में किसानों को बालू में उगने वाली लतादार सब्जी और दलहन की खेती कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित कर उन्हें बालू व बंजर जमीन पर किसानी का तरीका सिखाने की कवायद शुरू की गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र कटिहार द्वारा इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। बाढ़ के कारण बालू के फैलाव वाले इलाकों में किसानों को खेती के बदले स्वरूप से परिचित कराया जाएगा। साथ ही उन्हें बालू पर उगने वाली फसल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए चयनित क्षेत्र में किसानों को प्रशिक्षण देकर उनकी समस्या का हल निकालने का प्रयास भी किया जा रहा है। इसकी शुरूआत भी हो चुकी है। प्रथम चरण में क्षेत्र के जागरूक किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाना है।
बदलेगा किसानी का ट्रेंड, लौटेंगी खुशियां :
बाढ़ के कारण बर्बाद किसानों की परेशानी के निदान और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए खेती के अलग ट्रेंड से उन्हें अवगत कराया जाएगा। मौसम और जलवायु के आधार पर फसलों के चयन और उन्हें लगाकर बेहतर उत्पादन और मुनाफा की जानकारी किसानों को दी जाएगी। हल्की बालू वाले क्षेत्र में किसानों को मिट्टी परिवर्तन के तरिके और खेत को खेती लायक तैयार करने के गुर सिखाये जाऐंगे। यद्यपि बालू की मोटी परत चढ़ने पर किसानी थोड़ी मुश्किल जरुर होगी। लेकिन पारंपरिक खेती के बदले खेती का स्वरूप बलकर किसानों की खुशियां लौट सकती है।
लतादार सब्जी व दलहन की खेती करेंगे किसान
हल्की बालू वाली जमीन में किसान लतादार सब्जी की खेती कर सकते हैं। अभी के मौसम में किसान लौकी की उन्नत किस्म डोली सफेद, पूसा मंदरी, पूसा मेघदूत, आजाद हरित, नरेंद्र शंकर आदि प्रभेदों को लगा सकते हैं। इसके साथ ही बरबट्टी के लिए किसान कासी कंचन, पूसा बरसाती, नरेंद्र लोबिया, काची गौरी प्रभेद का चुनाव कर सकते हैं। साथ ही बालू वाली जमीन पर मूली व गाजर की खेती के टिप्स की किसानों को सिखाया जाएगा। अधिक बालू होने पर किसान सितंबर अरहर की फसल लगा सकते हैं। इनमें पूसा नौ व शरद प्रमुख है। यह प्रति हेक्टेयर 15-16 ¨क्वटल तक उपज देता है। इसके साथ ही उड़द की खेती भी किसानों के लिए लाभदायक है। उड़द की उन्नत प्रभेद 90 दिनों में तैयार हो जाती है और 10-12 ¨क्वलटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिलता है। इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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