संशो : भभुआ : अंधेरी आंखों को रोशनी दे पितृऋण चुका रहे 'वरूण'
कैमूर। शास्त्रों में पितृऋण का उल्लेख मिलता है। पिता के सपनों को पूरा कर बेटे पितृऋण च
कैमूर। शास्त्रों में पितृऋण का उल्लेख मिलता है। पिता के सपनों को पूरा कर बेटे पितृऋण चुकाते हैं। ऐसे ही एक पुत्र निर्धनों का निश्शुल्क इलाज कर पिता के अभियान को जारी रखे हुए हैं।
देश की आजादी की जंग लड़ने वाले अखलासपुर गांव निवासी लक्ष्मी सिंह ने 2 अक्टूबर 1960 को भभुआ- चैनपुर रोड पर अटल बिहारी सिंह उच्च विद्यालय के सामने गांधी कुष्ठ निवारण संस्थान की स्थापना की, जहां कुष्ठ रोगियों का इलाज शुरू हुआ। इस कार्य के लिए अखलासपुर के रामसूरत सिंह ने 3.5 एकड़ जमीन दान दी। इसके पूर्व लक्ष्मी बाबू ने 1954 में अपने गांव अखलासपुर में कस्तूरबा मातृ शिशु कल्याण केन्द्र भी खोला था। चिकित्सक बीबी साह के माध्यम से ही कुष्ठ रोगियों की सेवा का भाव जगा। बताते हैं कि वर्ष 1963 में संस्थान को पहली बार 24800 रुपये सरकार से अनुदान मिला। उसके बाद समय-समय पर राज्य व केन्द्र सरकार से मिलने वाले अनुदान से संस्थान क्रमश: विकास करता रहा। 1966-67 में प्रदेश में सूखा पड़ने पर जिले में एफ्रो द्वारा कुआं बनवाने का काम किया जा रहा है। ऐसे में गांधी कुष्ठ निवारण प्रतिष्ठान ने भी आगे बढ़कर जिले में तीन सौ कुओं का निर्माण कराया। इसका जिक्र लक्ष्मी बाबू के आस्ट्रेलियाई मित्र विलकेली ने अपनी पुस्तक जर्नी आफ ए रेस्टलेस स्प्रीट में किया है।
14 फरवरी 2012 को भले ही लक्ष्मी सिंह का निधन हो गया, लेकिन संस्थान के सचिव के रूप में उनके पुत्र वरूण कुमार पिता की ओर से स्थापित संस्थान के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण का सिलसिला अब भी जारी रखे हुए हैं। वरूण ने अस्पताल को नेत्र चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया। अब उनके पिता द्वारा शुरू किए गए अस्पताल में औसतन प्रतिवर्ष सौ की संख्या में जिले के गरीब लोगों का निश्शुल्क मोतियाबिंद का आपरेशन कर उनकी आंखों में रोशनी लाने का कार्य किया जाता है। विगत तीन वर्ष की चर्चा करें तो प्रतिवर्ष लगभग 12 सौ गरीब लोगों का निश्शुल्क नेत्र आपरेशन (लेंस प्रत्यारोपण) का कार्य संस्थान द्वारा किया गया है। इसके साथ-साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत अक्टूबर से दिसम्बर 2015 तक 70 रोगियों के हार्निया, पथरी आदि विभिन्न रोगियों का आपरेशन कर उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण का कार्य किया गया है। साथ ही 210 लोगों की आंख का आपरेशन किया गया। संस्थान के चिकित्सक डाल्टेनगंज निवासी राकेश कुमार की मानें तो गांधी कुष्ठ निवारण संस्थान में नेत्र रोगियों के आपरेशन के लिए फेको विधि की अत्याधुनिक मशीन विदेश से मंगाकर लगाई गई है। संस्थान द्वारा वर्ष 2015 में रामगढ़ रेफरल अस्पताल में शिविर लगाकर लगभग पांच सौ रोगियों का आपरेशन कर लेंस लगाया गया है। संस्थान के सचिव द्वारा बीते वर्ष अखलासपुर गांव में मातृ- शिशु कल्याण केन्द्र खोले जाने के लिए भूमि देने का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया है।
तीन वर्षो में किये गये आपरेशन का विवरण -
वर्ष - रोगियों की संख्या
2102 - 1100
2013 - 1200
2014 - 1400
2015 - 210 अक्टूबर से दिसम्बर तक
स्वस्थ समाज के निर्माण में संस्थान समर्पित -
गांधी कुष्ठ निवारण प्रतिष्ठान के अध्यक्ष सह पूर्व विधायक चंद्रमौली मिश्र ने कहा कि सेनानी लक्ष्मण सिंह द्वारा स्थापित यह संस्थान स्वस्थ समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो रहा है। संस्थान से जुड़े लोग ईमानदारी पूर्वक अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं।
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