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    Sabji ki Kheti: सब्जी की खेती ने इस गरीब गांव को बना दिया अमीर, कमाई ने तोड़ डाले सारे रिकॉर्ड

    कैमूर के रामगढ़ प्रखंड के भटौली गांव में सब्जी की खेती ने किसानों में क्रांति ला दी है। नई तकनीक से खेती कर किसान स्वावलंबी बन गए हैं और दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। गांव के 100 एकड़ से अधिक खेतों में विभिन्न सब्जियों की खेती हो रही है। सरकारी सुविधा नहीं मिलने के बावजूद गांव में सब्जी की खेती से समृद्धि की बयार बह रही है।

    By Pramod Tiwari Edited By: Sanjeev Kumar Updated: Tue, 28 Jan 2025 04:06 PM (IST)
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    सब्जी की खेती ने बदल दी गांव की किस्मत (जागरण)

    प्रमोद तिवारी, रामगढ़ (कैमूर)। Sabji ki Kheti Kamai: कैमूर के रामगढ़ प्रखंड के भटौली गांव में सब्जी की खेती ने किसानों में क्रांति ला दिया है। खेती की नई तकनीक से यहां के किसान अब दूसरे किसानों को खेती का गुर सिखा रहे हैं। अपने सब्जी की खेती से स्वावलंबी बन दूसरे जगह के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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    भटौली गांव के सौ परिवार से अधिक लोगों का सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक नाता खेती से रहता है। दुर्गावती नदी किनारे इनके परिश्रम व मेहनत से सब्जी की फसल लहलहा रही है।

    सरकारी सुविधा नहीं मिलने के बावजूद भटौली गांव में सब्जी की खेती से समृद्धि की बयार बह रही है। लौकी, बैगन, नेनुआं, गोभी, टमाटर व मंटर, परवल आदि सब्जी के पौधे लगे हैं। सब्जी का भाव गिरने से किसान थोड़ा मायूस नजर आ रहे हैं। 

    20 वर्ष पहले इस गांव में थी गरीबी 

    यही भटौली गांव है जहां बीस वर्ष पहले गरीबी थी। आज इनसे गरीबी पनाह मांगने लगी है। रामगढ़ मोहनियां पथ पर पनसेरवां दुर्गावती नदी पुल के पश्चिम व पूर्वी छोर पर लगभग 100 एकड़ से अधिक खेतों में हरियाली छाई है। यह हरियाली सब्जी के लहलहाते पौधे की है। 

    कमाई में तोड़ रहे रिकॉर्ड

    डहरक रामगढ़ व अंसी मौजा में सब्जी की खेती करने वाले भटौली के लोग लगभग 6 लाख रुपये से अधिक भूमि के किराए के रूप में चुकाते हैं। कमाई के मामले में यहां के लोग रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। दरअसल भटौली के लोग मोहनियां प्रखंड के हैं। यद्यपि भावनात्मक उनका लगाव रामगढ़ से है।

    महिला पुरुष दोनों सब्जी की खेती में पारंगत हैं

    भटौली गांव के पुरूष ही नहीं महिला किसानों ने भी खेती में पारंगत हासिल कर ली है। कहीं दंपती तो कहीं अन्य महिला पुरुष को खेतों में कुदाल फावड़ा चलाते हैं। दोनों लोगों की इस परंपरागत खेती को देख सड़क से गुजरने वाले लोग भी इनके कौशल को सलाम करते हैं।

    गांव के 50 मल्लाह परिवार, 17 पासवान परिवार, 10 कुशवाहा परिवार व 15 घर अजा परिवार व कुम्हार, परिवार के द्वारा मेहनत कर सब्जी पैदा की जा रही है।

    दुर्गावती नदी में दोनों तरफ 60 डीजल पंप दोनों तरफ चलते रहते हैं

    भटौली के रामबिलास चौधरी, संजय चौधरी, चुन्नू कुशवाहा आदि किसान रामगढ़ मोहनियां पथ के दैतरा बाबा स्थान के पास टोकरी में सब्जी की पैकिंग कर प्रतिदिन ट्रकों व जीपों में लादते रहते हैं। लोग बताते हैं कि सब्जी के पौधों की सिंचाई के लिए दुर्गावती नदी में दोनों तरफ 60 डीजल पंप अनवरत चलते रहते हैं।

    क्योंकि मिट्टी सिकत है इसलिए पानी की दरकार हमेशा होती है। पुल के पूर्वी छोर में बिजली की व्यवस्था तो है। एक सरकारी ट्यूबवेल भी इस समय कार्यरत है।

    लेकिन पश्चिमी छोर में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते उन्हें नदी में लगे डीजल पंप के सहारे ही खेतों की प्यास बुझानी पड़ती है। ये लोग बताते हैं कि इतने मेहनत के बावजूद भी सरकार हमलोगों के तरफ खास ध्यान नहीं देती।

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