कैमूर। कैमूर जिले का दुर्गावती प्रखंड उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। जहां नेशनल हाईवे एवं रेलवे स्टेशन के इर्द-गिर्द कुल मिलाकर लगभग दो दर्जन उद्योग लगाए गए हैं। उद्योग लगाने में बिहार सरकार का भी अहम योगदान है। लेकिन जितनी तेजी से प्रखंड में उद्योग लगाए गए उतनी तेजी से यहां के लोगों को रोजगार नहीं मिला। प्रखंड से बिल्कुल ही पलायन नहीं रुका। अब यहां लगाए गए उद्योग बंद होते जा रहे हैं। जिससे सरकार और स्थानीय लोगों को नुकसान हो रहा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दुर्गावती प्रखंड को राज्य सरकार के द्वारा औद्योगिक क्षेत्र भी घोषित नहीं किया गया है। इसके बाद भी यहां उद्योग धंधा स्थापित करने का प्रयास जारी है और पूर्व की कई फैक्ट्रियां संचालित हैं। जिसके कारण प्रखंड में प्रदूषण की समस्या नासूर बनी हुई है। जिस गांव के आसपास उद्योग लगाए गए हैं वहां गांव के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण लोगों को अपना शिकार बना रहा है। प्रखंड वासियों के लिए एक समस्या यह है कि यहां स्थापित कंपनियों के द्वारा बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता दी जा रही है। बताया जाता है कि यहां पतंजलि भी अपना प्रोडक्ट बनाने के लिए सोया रुचि कंपनी को खरीद कर पतंजलि नाम से चलाएगी। औद्योगिक कंपनियों के द्वारा आसपास के लोगों को रोजगार नहीं देना काफी गंभीर बात है।

फैक्ट्री प्रबंधन ने एक सीमा तय की है। जिसमें सौ किलोमीटर के दायरे के बाहर का व्यक्ति ही कंपनी में काम करेगा। वह भी सिर्फ दो शिफ्ट में 12- 12 घंटे ड्यूटी एक श्रमिक से ली जाती है और पारिश्रमिक के नाम पर सिर्फ तीन सौ रुपए रोज मिलते हैं।

Edited By: Jagran