Jamui: हर वार्ड में 20 लाख हो रहे खर्च, फिर भी लगा गंदगी का अंबार; अधिकारियों को सफाईकर्मियों की भा जानकारी नहीं
जमुई नगर में स्वच्छता व्यवस्था खराब है सड़कों और नालों में गंदगी का अंबार है। अधिकारियों को सफाई कार्य की जानकारी नहीं है जिससे सफाई एजेंसियां फायदा उठा रही हैं। नगर परिषद द्वारा हर वार्ड पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद नालों की सफाई नहीं हो रही है। बजट बढ़ने के बावजूद सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है।

संवाद सहयोगी, जमुई। नगर में स्वच्छता व्यवस्था की हालत बदतर है। हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद के स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी को यह तक जानकारी नहीं है कि सफाई कार्य में कितने मजदूर लगे हैं और इस पर कितनी राशि खर्च हो रही है, जबकि नियम के अनुसार उन्हें प्रतिदिन सफाई सुपरवाइजर और जमादार से रिपोर्ट लेकर जियो टैगिंग सुनिश्चित करनी होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शायद अधिकारियों की इसी लापरवाही का फायदा सफाई एजेंसियां उठा रही हैं। नतीजा यह है कि शहर की सड़कों और नालों में गंदगी का अंबार लगा है। शुक्रवार को बिहारी मोहल्ला स्थित मुख्य नाले की सफाई होते देख लोग हैरान रह गए।
उनका कहना था कि नाले के निर्माण के बाद पहली बार इसकी सफाई हो रही है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 में नगर परिषद ने न्यू टोला बिहारी मोहल्ला स्थित राजू सिंह के घर से विश्वनाथ सिंह के घर तक नाला निर्माण कराया था।
इसके बाद अब तक सफाई नहीं हुई। इस लापरवाही का खामियाजा स्थानीय लोग भुगतते रहे। नाले का पानी सड़कों पर बहने से मोहल्लेवासियों को बाजार आने-जाने में भारी परेशानी झेलनी पड़ती रही है। लोगों को अब भी आशंका है कि पूरी सफाई होगी या फिर कार्य अधूरा छोड़ दिया जाएगा।
हर वार्ड में 20 लाख सालाना खर्च
जानकारों के मुताबिक, नगर परिषद द्वारा सफाई एवं अपशिष्ट प्रबंधन पर प्रति वार्ड सालाना लगभग 24 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, यानी हर महीने करीब दो लाख रुपये की निकासी होती है।
इसके बावजूद नालों की वर्षों तक सफाई नहीं होती। इस पर जब दैनिक जागरण ने नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी सुभाष सक्सेना से सवाल किया तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। सफाई पर इतना खर्च सुनकर शहरवासी भी अचंभित हैं कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी गली-मोहल्लों और नालों की गंदगी जस की तस क्यों है।
बढ़ता बजट, गिरती सफाई व्यवस्था
हर साल नगर सरकार सफाई एवं अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बजट बढ़ाती है, लेकिन सफाई व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। यह स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, वरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने नगर परिषद को बेलगाम कर दिया है।
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