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जमुई के 4 नए डिग्री कालेजों में इसी सत्र से आर्ट्स की पढ़ाई, हर विषय में 48 सीटें; ड्रॉप आउट पर लगेगी रोक

Published: Sun, 03 May 2026 02:16 PM (GMT+05:30)

जमुई जिले के चार नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में सत्र 2026-30 से आर्ट्स संकाय की पढ़ाई शुरू होगी, जिससे छात्रों ...और पढ़ें

सोनो प्रखंड का मॉडल विद्यालय भवन, जहां संचालित होगा डिग्री कॉलेज। फोटो जागरण

सोनो प्रखंड का मॉडल विद्यालय भवन, जहां संचालित होगा डिग्री कॉलेज। फोटो जागरण

HighLights

  1. जमुई के 4 नए डिग्री कॉलेजों में आर्ट्स पढ़ाई शुरू.

  2. सत्र 2026-30 से होगी शुरुआत, हर विषय में 48 सीटें.

  3. छात्रों का पलायन रुकेगा, स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा मिलेगी.

संवाद सूत्र, सोनो (जमुई)। जिले में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया गया है। सत्र 2026-30 से जिले के चार नवसृजित राजकीय डिग्री कॉलेजों में आर्ट्स संकाय की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। इस पहल से वर्षों से चली आ रही वह समस्या काफी हद तक खत्म होगी, जिसमें जिले के छात्र-छात्राओं को ग्रेजुएशन के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था।

मुंगेर विश्वविद्यालय ने इन कॉलेजों में हिन्दी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र जैसे प्रमुख विषयों में पढ़ाई की स्वीकृति दी है।प्रत्येक विषय में 48-48 सीटें निर्धारित की गई हैं। यानी एक कालेज में सैकड़ों छात्रों को नामांकन का अवसर मिलेगा।

इससे जिले के युवाओं को अपने ही घर-परिवार के बीच रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा।चारों कालेज खैरा, सोनो, लक्ष्मीपुर और अलीगंज प्रखंड में स्थापित किए जा रहे हैं।

सोनो प्रखंड के राज्य संपोषित उच्च विद्यालय के पेनवाजन स्थित माडल स्कूल भवन, खैरा के उच्च विद्यालय बाघाखांड, अलीगंज के उत्क्रमित उच्च विद्यालय मिर्जागंज और लक्ष्मीपुर के उत्क्रमित उच्च विद्यालय हरला में कक्षाएं संचालित होंगी।

इन स्थानों का चयन रणनीतिक रूप से ऐसे इलाकों में किया गया है, जहां से आसपास के गांवों के छात्रों को आसानी से पहुंच मिल सके।अब तक जिले के सैकड़ों छात्र आर्थिक मजबूरियों के कारण बाहर जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते थे, जो जाते भी थे, उन्हें रहने-खाने और फीस का भारी खर्च उठाना पड़ता था।

नए कॉलेजों की शुरुआत से यह आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा।खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों के छात्रों के लिए यह फैसला किसी वरदान से कम नहीं है।

ड्रॉपआउट पर लगेगी लगाम, बढ़ेगी भागीदारी

बुद्धिजीवियों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर कालेज खुलने से पढ़ाई का माहौल मजबूत होगा और छात्र-छात्राओं की भागीदारी बढ़ेगी। अब दूरी और खर्च के कारण पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी खत्म होगी, जिससे ड्रॉपआउट दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

कॉलेजों में नामांकन पूरी तरह आनलाइन प्रक्रिया के तहत समर्थ पोर्टल के जरिए होगा। छात्र आवेदन करेंगे और मेरिट के आधार पर कालेज आवंटित किए जाएंगे। यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ-साथ समय की बचत और सुविधा भी सुनिश्चित करेगी।

आर्ट्स के इन प्रमुख विषयों की पढ़ाई से छात्रों को बीपीएससी, यूपीएससी, एसएससी समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलेगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जिले के युवाओं को नई दिशा देगा और उन्हें मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्थानीय लोगों ने इस निर्णय का जोरदार स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में साइंस और कामर्स संकाय की पढ़ाई भी शुरू की जाएगी,जिससे जिले में शिक्षा का दायरा और व्यापक हो सके।

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