बिहार में ये कैसा अमृत काल? झोपडी में चलता है आंगनबाड़ी केंद्र, आने-जाने के लिए पगडंडी का सहारा
जमुई के अंबाटांड़ गांव का पुजहर टोला मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहा है। 400 की आबादी वाला यह गांव सड़क के लिए तरस रहा है जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। यहां न तो सामुदायिक भवन है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र। शिक्षा और स्वच्छता की भी कमी है।

अमित कुमार राय, चंद्रमंडी (जमुई)। भले ही ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाने का कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा हो, लेकिन आज भी धरातल पर कई गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
स्थिति तो ऐसी है कि सड़क तक भी सुविधा नहीं है। लोग पगडंडी के सहारे आना-जाना करते हैं। इन्हीं गांवों में शामिल है, कियाजोरी पंचायत अंतर्गत अंबाटांड़ गांव का पुजहर टोला।
वार्ड नं. 9 स्थित 40 घरों और 400 की आबादी वाला यह गांव आज भी सड़क के लिए तरस रहा है। यहां के लोग आज भी पगडंडी से आना-जाना करते हैं। पक्की सड़क तक जाने के लिए ग्रामीणों को आधा किलोमीटर से अधिक का सफर तय करना होता है।
बरसात में इन लोगों को काफी कठिनाई होती है। यहां के ग्रामीण मिट्ठू पुजहर, चंद्र पुजहर, राजेश पुजहर, जलेश्वर पुजहर, अंती देवी, वीणा देवी, रिंकी देवी, कर्मी देवी आदि ने बताया कि कभी भी जनप्रतिनिधि हम लोगों की समस्या सुनते नहीं आते हैं।
कहते-कहते थक गए, लेकिन गांव में रोड नहीं बनी। पिपरापगार तक ही रोड पहुंची है। गांव में सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं है। फूस के मकान में आंगनबाड़ी केंद्र चलता है।
थक-हारकर ग्रामीणों ने बांस और पुआल के सहारे झोपड़ीनुमा सामुदायिक भवन बनाया है। उसी में बैठकर वे लोग सूप, दउरा और बांस का बर्तन बनाते हैं।
गांव से विद्यालय एक किलोमीटर दूर है। इस कारण छोटे बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते हैं। हालांकि, गांव में नल-जल योजना चल रही है। गांव के चार चापाकल में तीन चापाकल खराब हैं, जबकि एक चल रहा है।
तीनों कुआं ने मरम्मती के अभाव में दम तोड़ दिया है। गांव में एक भी शौचालय नहीं है। लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रिंस पांडय ने जिला प्रशासन से गांव में सड़क निर्माण की मांग की है।
सामुदायिक भवन नहीं रहने से ग्रामीणों को काफी दिक्कत होती है। आंगनबाड़ी के लिए भवन नहीं है। फूस के मकान में आंगनबाड़ी चल रहा है। - रघु पुजहर, ग्रामीण
प्रधानमंत्री आवास योजना भी किसी को नहीं मिला है। लगभग 20 साल पहले इंदिरा आवास मिला था जो अब काफी जर्जर हो गया है। रहने लायक नहीं है। - हरिकिशोर पुजहर, ग्रामीण
रोजगार का भी कोई साधन नहीं है। गांव के अधिकतर लोग ईंट-भट्ठा पर मजदूरी करते हैं, जबकि कुछ लोग बांस का बर्तन बनाकर अपनी जीविका चलाते हैं। - मालो देवी, ग्रामीण
जनप्रतिनिधि और अधिकारी कभी हम लोगों की समस्या सुनने नहीं आते हैं। सिर्फ वोट लेने के समय नेता आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। - ललिता देवी, ग्रामीण
जल्द ही गांव में पंचायत के मद से सड़क का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही सामुदायिक भवन निर्माण के लिए भी प्रयास किया जाएगा। - कृष्ण कुमार सिंह, बीडीओ, चकाई
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