जहानाबाद में स्कूल वाहन गाइडलाइन का नहीं कर रहे पालन, मासूम की मौत के बाद जागा परिवहन विभाग
परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर नए गाइडलाइन जारी होते रहते हैं। पिछले साल परिवहन विभाग द्वारा स्कूल बसों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी किए गए थे। लेकिन जहानाबाद में लेकिन जमीनी हकीकत इस गाइडलाइन के ठीक उलट नजर आ रहा है। हालांकि मासूम की मौत की घटना के बाद कुछ निजी विद्यालय के बसों में खलासी भी देखे जा रहे हैं।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर नए गाइडलाइन जारी होते रहते हैं। पिछले साल परिवहन विभाग द्वारा स्कूल बसों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी किए गए थे।
जिला परिवहन विभाग के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार गाइडलाइन के तहत सभी स्कूल वाहन सुनहरे पीले रंग का होना अनिवार्य है। बस के आगे और पीछे बड़े अक्षरों में स्कूल का नाम होना जरूरी है।
इसके अलावा स्कूल वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा बाक्स, अग्निशामक यंत्र, जीपीएस, पैनिक बटन व कैमरा लगाना अनिवार्य है। साथ ही साथ सीसीटीवी फुटेज स्कूल प्रबंधन को दो माह तक सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्रों को वाहन में चढ़ने, उतरने में परेशानी ना हो ऐसी सुविधा भी होना जरूरी है। साथ ही प्रत्येक स्कूल वाहन में रेट्रो रिपलेक्टिव टेप लगाना भी अनिवार्य होगा।
ड्राइवर के अलावा बस में एक खलासी भी होना जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत इस गाइडलाइन के ठीक उलट नजर आ रहा है। सभी स्कूल बसों का रंग तो सुनहरे पीले रंग के हैं आगे और पीछे स्कूल का नाम भी मोटे अक्षरों में लिखा हुआ है। लेकिन अन्य गाइडलाइन नदारद हैं।
कुछ बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तथा जीपीएस की भी सुविधा उपलब्ध है, लेकिन कंडक्टर,सीसीटीवी कैमरा, अग्निशमन यंत्र तथा पैनिक बटन किसी भी स्कूल बस में नहीं है। हालांकि, मासूम की मौत की घटना के बाद कुछ निजी विद्यालय के बसों में खलासी भी देखे जा रहे हैं।
इधर जिला परिवहन पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि परिवहन विभाग के जो भी गाइडलाइन उपलब्ध है उसका अनुपालन सभी स्कूल बसों को करना अनिवार्य है।
हम लोग इसे लेकर रनिंग अवस्था में स्कूल बसों की जांच की भी मुहिम चलाने जा रहे हैं। जो भी नियम के अनुरूप नहीं रहेंगे संबंधित विद्यालय संचालक के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिला परिवहन संघ के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि डीएवी को छोड़कर सभी बड़े निजी विद्यालयों के पास अपना बस है,जबकि छोटे विद्यालय वाहन मालिकों से किराए पर बसें ले रखे हैं। किराया निर्धारित किए जाते समय बस मालिक और स्कूल संचालकों के बीच जो एग्रीमेंट तय होता है उसके अनुसार ही सुविधा उपलब्ध होती है।
हालांकि कोई भी बस मालिक अपने उन बसों को ही स्कूलों में देना पसंद करते हैं जिसे सड़क पर संचालित रखने में कार्रवाई का डर रहता है। अब तक स्कूल के नाम पर संचालित बसों की विशेष जांच पड़ताल परिवहन विभाग द्वारा नहीं की जाती रही है।
जिसके कारण एक ओर स्कूल संचालकों को भी सस्ते दर पर बस मिल जाते हैं और बस मालिक को भी गाड़ी खड़ा रखने की बजाय कुछ मुनाफा प्राप्त हो जाता है। इस स्थिति से स्पष्ट है कि वाहन मालिक उन बसों को ही स्कूल संचालकों को देते हैं जो पूरी तरह से परिवहन विभाग के नियमानुसार रिजेक्ट हो जाते हैं।
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