दिल्ली बम ब्लास्ट में संलिप्तता बता रिटायर्ड डॉक्टर से 27 लाख की ठगी, 'डिजिटल अरेस्ट' कर बड़ा फ्रॉड
दिल्ली में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड डॉक्टर को दिल्ली बम ब्लास्ट में शामिल होने का आरोप लगाकर 'डिजिटल अरेस्ट' किया और उनसे 27 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने डॉक्टर को बताया कि उनका आधार कार्ड नंबर आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किया गया था। डॉक्टर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। साइबर अपराध से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

रिटायर्ड डॉक्टर से 27 लाख की ठगी
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जिले में साइबर अपराधियों के द्वारा एक रिटायर्ड डॉक्टर को मुंबई क्राइम ब्रांच के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर 27 लाख रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। सदर थाना क्षेत्र के पूर्वी गांधी मैदान मोहल्ला निवासी डॉक्टर अरुण कुमार को दिल्ली बम ब्लास्ट कांड में आरडीएक्स की खरीद-बिक्री में उनके खाते का इस्तेमाल होने का भय दिखा 24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर रखा।
इस अवधि में डॉक्टर के खाते से तीन बार में कुल 27 लाख 30 हजार रुपये ठग लिए। डॉक्टर अरुण कुमार ने साइबर थाना में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि मोबाइल नंबर पर अज्ञात नंबर से कॉल आया। पत्नी ने कॉल रिसीव किया तो बताया गया कि डॉक्टर अरुण से जरूरी बात करनी है।
एटीएस ब्रांच मुंबई का अधिकारी
मोबाइल देने पर कॉल करने वाले ने स्वयं को एटीएस ब्रांच मुंबई बताया और कहा कि आपके नाम से जम्मू-कश्मीर में केनरा बैंक में खाता है, जिसका उपयोग दिल्ली बम ब्लास्ट में आरडीएक्स की खरीद-बिक्री में किया गया है। तीन करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।
कॉल करने वाले ने धमकी दी कि यदि वह सहयोग नहीं करेंगे, तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद एक कथित डीएसपी से कराई गई, जिसने वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को पुलिस अधिकारी साबित करते हुए 50 लाख रुपये की मांग की।
तीन लाख रुपये कोर्ट खर्च के नाम पर जमा मांगे
उन्होंने कहा कि हमने ही दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया था। अग्रिम जमानत लेने के लिए पहले तीन लाख रुपये कोर्ट खर्च के नाम पर जमा करने होंगे। डॉ. अरुण के अनुसार उन्होंने डर के कारण स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा जहानाबाद से जाकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम भेज दी। पहली बार तीन लाख, फिर 20 लाख, उसके बाद दो लाख और अंत में फिर दो लाख रुपये भेजे। इसके बाद 10 लाख रुपये और मांगे गए।
खाते में अब एक भी रुपये नहीं बचे थे तब उधार मांगने के लिए एक रिश्तेदार को फोन किया, तब रिश्तेदार ने बताया कि आप ठगी के शिकार हो गए हैं। यह सुनते ही मेरे होश उड़ गए। तुरंत साइबर सेल के टोल फ्री नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर थाना में आवेदन दिया।
खातों की जांच की जा रही
साइबर डीएसपी कृष्ण गोपाल ने कहा कि आवेदन के आलोक में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, जिस मोबाइल नंबर से कॉल किया गया और जिन खातों में रकम भेजी गई, उसकी जांच की जा रही है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी आपराधिक दबाव या सरकारी विभाग का दावा करने वाले कॉल आने पर तुरंत 1930 पर सूचना दें और किसी भी परिस्थिति में अज्ञात खातों में पैसा न भेजें।

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