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    ना शिक्षक, ना प्रयोगशाला फिर भी हर साल पास होते हैं 40 एग्रीकल्चर कोर्स के छात्र

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 03:18 PM (IST)

    अरवल के जीए उच्च विद्यालय में कृषि शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। 2018 में शुरू हुए एग्रीकल्चर कोर्स में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है जिससे छात्रों को बिना उचित मार्गदर्शन के ही पढ़ाई करनी पड़ रही है। प्रयोगशाला के अभाव में आधुनिक कृषि तकनीकों को समझना मुश्किल हो रहा है। 147 छात्र पास भी हो चुके हैं लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल बना हुआ है।

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    बिना एग्रीकल्चर की पढ़ाई के पास हो गए 147 विद्यार्थी

    जागरण संवाददाता, अरवल। जिले के एक मात्र जीए उच्च विद्यालय में इंटर स्तरीय व्यावसायिक शिक्षा के लिए एग्रीकल्चर कोर्स की शुरुआत 2018 में हुई थी। पढ़ाई के लिए प्रत्येक वर्ष 40 विद्यार्थियों के लिए सीट उपलब्ध है। इस वर्ष आठवीं सत्र का नामांकन हुआ है।

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    2018 से लेकर अब तक एग्रीकल्चर कोर्स में 260 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। इस विद्यालय से 147 एग्रीकल्चर कोर्स में पढ़ाई करने वाले बच्चे पास आउट भी हो चुके हैं। जबकि एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए यहां आज तक शिक्षक की बहाली नहीं हुई है।

    प्रयोगशाला नहीं है, एग्रीकल्चर की पढ़ाई में विद्यार्थियों को प्रयोगशाला की ज्यादा जरूरत होती है। लैब में बिना रसायन के प्रयोग किए विद्यार्थी आधुनिक कृषि के तकनीक नहीं समझ पाएंगे।

    यह कोर्स करने के बाद पास आउट विद्यार्थियों को कृषि विभाग या एग्रीकल्चर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों में नौकरी आसानी से मिल जाती है। कृषि विभाग द्वारा खाद, बीज, कृषि यंत्र की दुकान खोलने के लिए लाइसेंस भी पढ़ाई के आधार पर मिल जाता है।

    स्नातक और आगे की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी कृषि विभाग के अधिकारी और विज्ञानी भी बनते हैं।

    बिना पढ़ाई और लैब के ही 147 विद्यार्थी हुए पास एग्रीकल्चर के कोर्स में नामांकन लेने वाले छात्र बिना शिक्षक और प्रयोगशाला के ही बिना पढ़ाई किए पास हो चुके है। व्यावसायिक कोर्स होने के कारण इस विषय की पढ़ाई अन्य किसी निजी संस्थान में भी नहीं होती है।

    आगे की पढ़ाई के लिए भी कोई कॉलेज जिले में नहीं है। ऐसे में इस व्यावसायिक शिक्षा में नामांकन लेने वाले विद्यार्थी भगवान भरोसे पढ़ाई कर रहे हैं।

    इंटर स्तरीय व्यावसायिक शिक्षा में दाखिला ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। आजतक इस विषय के एक भी शिक्षक की पदस्थापना विद्यालय में नहीं हुई और ना ही इसके अनुरूप प्रयोगशाला और भवन का निर्माण किया गया। यहां केवल नामांकन,रजिस्ट्रेशन और फार्म भरा जाता है, पढ़ाई नहीं होती हैं। इसको लेकर विभाग को अवगत कराया गया है। - अखिलेश्वर प्रसाद सिंह,प्रभारी प्राचार्य