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    बिहार की बैकुंठपुर सीट पर 2020 में बगावत से टूटा था NDA का वोट बैंक, इस बार दिलचस्प होगा समीकरण

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 05:22 PM (IST)

    गोपालगंज की बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर सबकी नजर है। यहां हर साल बाढ़ आती है पर राजनीति भी चरम पर रहती है। 2020 में राजद के प्रेम शंकर प्रसाद जीते थे क्योंकि राजग में फूट पड़ गई थी। अब देखना यह है कि 2025 के बिहार चुनाव में क्या भाजपा और जदयू मिलकर चुनाव लड़ेंगे या नहीं क्योंकि यहां गठबंधन की मजबूती ही जीत का रास्ता तय करती है।

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    गोपालगंज की बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर सबकी नजर। (जागरण)

    मनीष कुमार, गोपालगंज। जिले की बैकुंठपुर विधानसभा सीट एक बार फिर चुनावी सुर्खियों में है। पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सिवान और सारण की सीमाओं से घिरा यह क्षेत्र गंडक नदी के किनारे बसा है।

    हर साल बाढ़ की विभीषिका और जलभराव की समस्या झेलने के बावजूद यहां की पहचान सिर्फ बाढ़ से नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों से भी तय होती है। बैकुंठपुर में जीत का रास्ता हमेशा गठबंधन की मजबूती या टूटन से होकर गुजरता है, यही वजह है कि यह सीट हर चुनाव में निर्णायक साबित होती रही है।

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    विधानसभा चुनाव 2020 में भारतीय जनता पार्टी (राजग समर्थित) ने अपने सिटिंग कैंडिडेट मिथिलेश तिवारी पर भरोसा जताया, लेकिन जनता दल यूनाइटेड (राजग समर्थित) से टिकट की दावेदारी कर रहे पूर्व विधायक मंजीत सिंह नाराज होकर निर्दलीय मैदान में उतर आए। इस बगावत ने गठबंधन धर्म के साथ ही परंपरागत राजग वोट बैंक तोड़ दिया।

    नतीजा यह हुआ कि महागठबंधन समर्थित राजद को सीधा फायदा मिला और प्रेम शंकर प्रसाद मतदाताओं की पसंद बनकर विधानसभा पहुंचे। दिलचस्प यह रहा कि चुनाव खत्म होते ही मंजीत सिंह फिर से जदयू में लौट आए। 

    आज भी वही समीकरण

    आज भी वही समीकरण है। भाजपा से मिथिलेश तिवारी टिकट की दौड़ में हैं और जदयू से मंजीत सिंह अपनी दावेदारी जता रहे हैं। दोनों ही पूर्व विधायक हैं और भाजपा व जदयू एकसाथ राजग में। सवाल वही पुराना है। क्या इस बार राजग भीतर से मजबूत रह पाएगा, या फिर कोई नई दरार विपक्ष को मौका देगी?

    बैकुंठपुर के मतदाता सिर्फ नेताओं के नाम पर भरोसा नहीं करते। यहां का फैसला गठबंधन की मजबूती और तालमेल पर टिका रहता है। अगर राजग भीतर से कमजोर पड़ा, तो उसका असर सीधे नतीजों में दिखेगा और विपक्ष को बढ़त मिल जाएगी।

    विकास योजनाओं से लेकर राखी के रिश्ते तक

    इस सीट की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल क्षेत्र में ठंड व घने कोहरे के बीच मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक कदम रख चुके हैं। चार जनवरी को जब मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत करने निकले, तो करसघाट पंचायत ही उनका पहला पड़ाव बना।

    उस दिन उन्होंने 140 करोड़ रुपये की लागत वाली 72 योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास रिमोट दबाकर किया। इनमें 61 योजनाओं का लोकार्पण और 11 योजनाओं का शिलान्यास शामिल रहा। इतना ही नहीं, तीन अगस्त को फिर बैकुंठपुर सुर्खियों में रहा।

    महारानी उच्च विद्यालय में रक्षाबंधन को लेकर आयोजित बहन सम्मान समारोह में वर्षा के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव पहुंचे। यहां महिलाओं ने उन्हें और विधायक प्रेम शंकर प्रसाद को राखी बांधी। यह महज परंपरा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी था। आखिर गोपालगंज, तेजस्वी का गृह जिला जो है।

    यहां सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सबको अपनी मौजूदगी दर्ज करानी ही पड़ती है। इस जमीन पर कदम रखे बिना कोई राजनीति अधूरी लगती है।

    2015 में बगावत की लहर से महागठबंधन आहत

    2015 का वह चुनाव आज भी लोगों की यादों में है, जब बगावत की लहर ने महागठबंधन की जीत का सपना चकनाचूर कर दिया था। जदयू (महागठबंधन समर्थित) से सिटिंग कैंडिडेट मंजीत सिंह मैदान में थे, जबकि भाजपा (राजग समर्थित) से मिथिलेश तिवारी ने ताल ठोकी थी।

    उस समय महागठबंधन में राजद और जदयू साथ थे, मगर टिकट बंटवारे की नाराजगी ने पूरा खेल बदल दिया। राजद के पूर्व विधायक देवदत्त प्रसाद की पत्नी मनोरमा देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मोर्चा संभाला। नतीजा यह हुआ कि महागठबंधन का वोट बिखर गया और मिथिलेश तिवारी ने जीत का परचम लहरा दिया।

    मतभेद गहराया तो विपक्ष को फायदा

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बैकुंठपुर की जनता सिर्फ उम्मीदवार नहीं, बल्कि गठबंधन की एकजुटता देखकर फैसला करती है। अगर इस बार भाजपा और जदयू साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं और तालमेल बनाए रखते हैं, तो राजग के लिए यह सीट सुरक्षित रह सकती है।  लेकिन अगर मतभेद गहराए, तो इसका फायदा सीधे विपक्ष को मिल सकता है।

    2020 के विस चुनाव का परिणाम

    प्रत्याशी प्राप्त मत मत प्रतिशत
    प्रेम शंकर प्रसाद (राजद) 67,807 37.01%
    मिथिलेश तिवारी (भाजपा) 56,694 30.95%
    मंजीत कुमार सिंह (निर्दलीय) 43,354 23.67%
    नोटा 4,097 2.24%

    2015 के विस चुनाव का परिणाम

    प्रत्याशी प्राप्त मत मत प्रतिशत
    मिथिलेश तिवारी (भाजपा) 56,162 35.11%
    मंजीत कुमार सिंह (जदयू) 42,047 26.29%
    मनोरमा देवी (निर्दलीय) 36,734 22.97%
    नोटा 4,813 3.01%