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Pitru paksha 2026 का अंतिम पड़ाव: अगले 5 दिन इन वेदियों में होंगे पिंडदान, फल्गु नदी में दूध से तर्पण 

Published: Sun, 04 Oct 2026 05:20 PM (IST)

गयाजी में पितृपक्ष मेला अपने अंतिम चरण में है, जिसमें अगले पांच दिनों में महत्वपूर्ण पिंडवेदियों पर पिंडदान और फल्गु नदी में दूध से तर्पण किया जाएगा।

गयाजी का मेला। फोटो जागरण

गयाजी का मेला। फोटो जागरण

जागरण संवाददाता, गयाजी। प्राचीन धार्मिक नगरी गयाजी मोक्षभूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यही कारण है कि वर्षभर देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पितरों के मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंचते हैं। पितृपक्ष में इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। इस दौरान हजारों की संख्या में पिंडदानी गयाजी प्रत्येक दिन पहुंचकर विभिन्न पिंडवेदियों पर अपने पितरों का श्राद्धकर्म करते हैं।

अब अंतिम पड़ाव पर पितृपक्ष

25 सितंबर से प्रारंभ हुआ पितृपक्ष मेला अब अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। दस दिन का श्राद्धकर्म पूरा हो चुका है और अब पांच दिन शेष हैं। त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वाले पिंडदानियों ने इन दस दिनों में गयाजी की विभिन्न महत्वपूर्ण पिंडवेदियों पर कर्मकांड किया।

गोदावरी, फल्गु, प्रेतशिला, रामकुंड, काकबलि, उत्तर मानस, कनखल, धर्मारण्य कूप, बौद्ध दर्शन, ब्रह्मसरोवर, रूपपद, ब्रह्मपद, कार्तिकपद, सूर्यपद, चंद्रपद, गणेशपद, इंद्रपद, कश्यपद और सीताकुंड सहित अन्य वेदियों पर पिंडदान और तर्पण का सिलसिला जारी रहा।

अगले पांच दिनों में क्या होगा?

अब पितृपक्ष के शेष पांच दिनों में पिंडदानी महत्वपूर्ण वेदियों पर कर्मकांड पूरा करेंगे। गयाकूप, मुंडपृष्ठ, भीमगया और गौप्रचार वेदियों पर पिंडदान के साथ फल्गु नदी में दूध का तर्पण किया जाएगा।

इसके अलावा पितृ दीपावली, वैतरणी और अक्षयवट वेदी पर भी पिंडदान एवं तर्पण का विधान पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही त्रिपाक्षिक श्राद्ध की महत्वपूर्ण प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी।

पितृपक्ष के अंतिम दिनों में भी देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे पिंडदानियों की भीड़ इन वेदियों पर देखने को मिलेगी। पिंडदानी निर्धारित विधि-विधान के अनुसार अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करेंगे।

10 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा मेला 

मान्यता और धार्मिक परंपरा के अनुसार, गयाजी में विभिन्न वेदियों पर किए जाने वाले कर्मकांड का अपना अलग महत्व है।

शेष पांच दिनों में कर्मकांड पूरा होने के बाद 10 अक्टूबर को एक पखवारे तक चलने वाला पितृपक्ष मेला संपन्न हो जाएगा। इसके साथ ही मोक्षनगरी गयाजी में देश-विदेश से आए लाखों पिंडदानियों की धार्मिक यात्रा भी पूरी होगी।

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