विजयादशमी यानी मंगलवार की रात 11 बजे थे। प्रशासन द्वारा निर्गत पांच लाइसेंसी मां दुर्गा की मूर्ति दुखहरणी मंदिर द्वार से पास कराया जा रहा था। सब कुछ सामान्य था। मूर्ति को लेकर उत्साहित श्रद्धालु आगे बढ़ रहे थे। अत्याधिक भीड़ के कारण प्रतिमा धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। प्रतिमा एक स्थल पर पहुंची, जहां पड़ोसी देश के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। यह नारा एक समाज विशेष को नागवार गुजरा। आपत्ति जताई, लेकिन नारेबाजी चलती रही। स्थिति बिगड़ते देख कोतवाली थानाध्यक्ष संजय कुमार ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर दिया। उस पर लोग भड़क गए। फिर भी नारे को बुलंद करते रहे। हंगामा और नारेबाजी के बीच एक पक्ष की ओर से कुछ रोड़े फेंके गए। जब तक उसे रोक पाते। उसी तरफ से प्लास्टिक की कुर्सी चलीं।

समिति के सदस्य वहां से जान बचाकर भागे। तब तक मामला बिगड़ा गया था। पथराव शुरू हो गई। स्थिति को देखते हुए सिटी एसपी मंजीत ने सख्ती अपनाई। पूरा पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। लाठी चली और भगदड़ मच गई। मूर्ति को छोड़कर भागने लगे। किसी तरह स्थिति नियंत्रण में आया।

वहां पर मौजूद डीडीसी किशोरी चौधरी, एडीएम राजकुमार सिन्हा, एसडीओ सत्येंद्र कुमार गुप्ता ने हंगामा कर रहे लोगों को समझाया। फिर कड़ी सुरक्षा के बीच क्रम वार मूर्ति को पास कराने का सिलसिला शुरू हुआ।

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पांच मूर्ति को पास कराने

में लग गए पांच घंटे

दुखहरणी द्वार से पांच मूर्ति को गुजारने में पांच घंटे का समय लग गया। यहां पर पुलिस की भारी बंदोबस्ती थीं, लेकिन उसमें अधिकांश महिला पुलिस मूकदर्शक थे। ऐसे में सिटी एसपी के कंधों पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारी थी। उनके सहयोग के लिए एएसपी ऑपरेशन अरुण कुमार सिंह को लगाया गया था। हंगामा और पथराव के बीच पुलिस ने सबसे पहले अपनी कवच धारण किया। सुरक्षा में लगे जवानों ने मूर्ति के साथ रहे लोगों को धमकाया। कहा कि ज्यादा हल्ला किया तो यहीं पर दाग देंगे। इस पर प्रशासन के अधिकारी ने हस्तक्षेप किया। बुधवार अल सुबह तीन बजे मूर्ति पास कराया गया।

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ईट-पत्थर से पटा

सराय से चौक रोड

दुखहरणी से चौक रोड प्रमुख मार्ग है। इस मार्ग पर जहां तक नजरें जा रही थीं ईट-पत्थर पसरा हुआ था। दोनों पक्षों की ओर से पथराव हुई। यह दृश्य देखकर दशहरा मेला देखने आए लोग काफी भयभीत हो गए। अफरातफरी का माहौल देखा गया। इस मार्ग पर रहने वाले भी उतारू हो गए। पहले मूर्ति को और फिर स्वयं। कुछ समय के बाद माहौल को शांत कराया गया। हंगामा और पथराव रमना मोहल्ले तक पहुंचा। वहां पडाल में रखी कुर्सी को तोड़ा गया। राहगीर को पीटा गया। भगदड़ में राहगीरों को चोटें आई।

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दहशत में गुजरी रात

चौक रोड पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। सैफ, जिला पुलिस बल, वरीय अधिकारी के अंगरक्षक, दंगा नियंत्रण वाहन सहित अन्य सुरक्षा बल मौजूद थे। इन जवानों ने मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति को संदिग्ध निगाह से देख रहे थे। किरण सिनेमा से चौक, चौक से कोतवाली, चौक से रमना रोड में पुलिस ने आम राहगीरों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। कई बार भगदड़ मच गई। लेकिन कुछ अधिकारियों की सूझ-बूझ से स्थिति पर काबू पाया गया। इन मार्गो पर पुलिस ने रातभर लाठियां भांजीं।

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देर रात तक कैंप करते

रहे डीएम व एसएसपी

हंगामा, पथराव और मारपीट की सूचना पर डीएम अभिषेक सिंह एवं एसएसपी राजीव मिश्रा पहुंचे। द्वय अधिकारी ने कमान संभाली। दोनों अधिकारी बुधवार की अल सुबह 3:30 बजे तक चौक रोड में जमे रहे। इस बीच, चौक टावर के समीप एक मकान से पथराव में जवान राजू कुमार सिंह को चोट लगी। घायल हो गया। इसका इलाज जेपीएन अस्पताल में कराया गया। यह देखकर द्वय अधिकारी हाथ डंडा लेकर निकले। शरारती तत्वों की पिटाई की और 12 लोगों को हिरासत में लिया गया।

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छात्रों की कैरियर खराब

करने का लगाया आरोप

हिरासत में लिए 12 आरोपितों को बुधवार शाम को गया कोर्ट लाया गया। यहां मौजूद परिजनों ने आरोप लगाया कि छात्रों का भविष्य पुलिस खराब कर रही है। जो छात्र रमना के पनडरिवा में मूर्ति की सुरक्षा में लगी थी, उन्हें हिरासत में लिया गया। एक छात्र पूजा कर रहा था। उसे पकड़ा गया। तीनों छात्र कोलकाता से गया अपने घर दशहरा में शामिल होने आए थे। तीन छात्रों का 15 अक्टूबर को कोलकाता में कैंपस सेलेक्शन है। पुलिस ने इनका कैरियर बर्बाद कर दिया है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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मेडिकल जांच करा

भेजा गया जेल

वरीय अधिकारी के निर्देश पर जिन 12 लोगों को हिरासत में लिया गया था। उनकी मेडिकल जांच कराई गई। इसमें अधिकांश शराब के नशे में थे। उपद्रव करते पकड़े गए लोगों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

राजकुमार शाह, डीएसपी टाउन, गया

Posted By: Jagran

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