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    कभी थी शान की सवारी, अब सड़कों से गायब हो रही बैलगाड़ी, सामान और इंसान दोनों को ढोती थी यह गाड़ी

    By Prashant KumarEdited By:
    Updated: Mon, 14 Dec 2020 10:40 AM (IST)

    सबसे आगे हमारी बैलगाड़ी... अब सड़कों से विलुप्त हो रही है। एक जमाने में यातायात का मुख्य साधन बैल गाड़ी अब देखने को कम मिल रही है। आधुनिक युग में खेती के हल बैल बोझा ढोने के काम में आनेवाले बैल गाड़ी देखने को नहीं मिल रहा है।

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    सड़कों पर अब कम दिखती है बैलगाड़ी। जागरण।

    गया, जेएनएन। सबसे आगे हमारी बैलगाड़ी... अब सड़कों से विलुप्त होने के कगार पर आ गया है। एक जमाने में यातायात का मुख्य साधन बैल गाड़ी अब देखने को कम मिल रही है। आधुनिक युग में खेती के हल बैल, बोझा ढोने के काम में आनेवाले बैल गाड़ी देखने को नहीं मिल रहा है। ट्रैक्टर,थ्रेसर, और कृषि उपकरण के आ जाने से बैलों को लोग पालन करना बन्द कर दिया है। किसान अपने खेतों में समय बचत करने के लिए मशीनों का सहारा ले रखा है।फसल काटने से लेकर बोने तक मशीनों का प्रचलन बढ़ गया है।

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    अक्‍सर बैलगाड़ी से ढोई जाती थी फसल

    फसल ढोने, दोनों से लेकर कुटी काटने एवं धान कूटने,गेहूं पीसने का काम अब मशीन कर रही है।बैल गाड़ी रहने से पशुओं को लोग पालते थे। बैल से खेतों की जुताई होती थी। किसान अपने खेतों से फसल बैल गाड़ी से ढोते थे।पशु के लिए चारा नेवारी,पुवाल को अपने घरों के छत पर रखा करते थे। सिंचाई के साधन के लिए रेहट, ईख पेर ने के लिए कोलसार मे मशीन लगाया जाता था जिसे बैल खीचा करते थे। कोल्सार से गुड की सोंधी महक दूर दूर तक फैल जाती थी।ईख का रस और गरम गरम गुड खाने के लिए लोग किसान के खेतों में पहुंच जाया करते थे। समय के साथ साथ किसान भी अपनी खेती करने का तरीका बदलकर अपने पुरानी बैलगाड़ी को छोड़कर ट्रैक्टर और मशीन के भरोसे हो गए।

    मशीन युग में नहीं रहा महत्‍वप

    किसान अपने रेहट, कोलसार और लाढ़ कुड़ी को बेचकर मशीन युग में प्रवेश कर गए है। ग्रामीण इलाकों में बैलगाड़ी की सवारी शान की सवारी कही जाती थी।खराब सड़कों पर भी बैलगाड़ी लोगों को अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचा देती थी। मायके से ससुराल जाना हो या किसी समारोह मे जाना हो तो बैल गाड़ी एक यातायात का बढ़िया साधन था। आनेवाले समय के बच्चो के बीच बैल गाड़ी की कहानी बताने वाला भी कोई नहीं होगा।