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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 05, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Interesting Story: मुखिया बनने से पहले हिसुआ की विधायक बन गईं नीतू कुमारी, जानिए कैसे हुआ यह

By Vyas ChandraEdited By:
Published: Sat, 05 Dec 2020 09:24 AM (IST)Updated: Sat, 05 Dec 2020 01:57 PM (IST)

पूर्व मंत्री आदित्‍य सिंह की पुत्रवधू नीतू कुमारी इसी वर्ष मार्च में होने वाले मुखिया के उपचुनाव में किस्‍मत आजमाने ...और पढ़ें

हिसुआ की विधायक नीतू कुमारी। जागरण आर्काइव
हिसुआ की विधायक नीतू कुमारी। जागरण आर्काइव

वरुणेंद्र कुमार, नवादा।  नीतू कुमारी मुखिया तो नहीं बन सकीं लेकिन विधायक की कुर्सी पर जरूर काबिज हो गईं। बात हिसुआ विधानसभा से कांग्रेस की विधायक नीतू कुमारी की हो रही है। ये इसी वर्ष मार्च में होने वाले मुखिया के उपचुनाव में खड़ी होने वाली थीं। हालांकि कोरोना की वजह से ऐन वक्‍त पर चुनाव टल गया। लेकिन यही वर्ष इन्‍हें माननीय की कतार में खड़ा कर गया। नीतू कुमार को राजनीति विरासत में मिली है। ससुर स्‍व.आदित्‍य सिंह मंत्री रह चुके हैं। स्‍वयं भी जिला परिषद अध्‍यक्ष रह चुकी हैं।

जिला परिषद (District Board) अध्‍यक्ष की संभाल चुकी हैं कुर्सी

इनका राजनीतिक सफर करीब दो दशक का रहा है। पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद 2001 में हुए पहले चुनाव में ही जिला पार्षद निर्वाचित हुईं थी। उसके बाद 2006 के पंचायत चुनाव में दूसरी बार जिला पार्षद बनीं। इस बार लंबी छलांग लगाते हुए जिला परिषद अध्यक्ष बन गईं। उतार-चढ़ाव के बावजूद पांच साल तक अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहीं। इस दौरान 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट किस्‍मत आजमाया। लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2011 में जिला परिषद का चुनाव हार गईं। पुन: 2015 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन कामयाबी फिर दूर रही। अब इस बार वे फिर कांग्रेस की प्रत्‍याशी बनीं और जीत गईं।

उपचुनाव में मुखिया पद के लिए दी थी उम्‍मीदवारी

मार्च 2020 में नीतू कुमारी के पंचायत नरहट में मुखिया का चुनाव होना था। यह सीट उनकी सास के पदच्यूत होने की वजह से खाली हुई थी। उपचुनाव की बारी आई तो नीतू ने भी अपनी उम्मीदवारी दी थी। देवरानी भी प्रत्याशी थीं। लेकिन मतदान के ऐन मौके पर चुनाव टल गया। कोरोना संकट के  कारण उपचुनाव को टाल दिया गया था। कोरोना संकट लंबा चला और चुनाव अबतक नहीं हुआ। अलबत्ता विधानसभा का चुनाव हो गया और नीतू विधायक बन गईं।

ससुर आदित्य सिंह की बनी हैं राजनीतिक उत्तराधिकारी

नीतू कुमारी पूर्व मंत्री आदित्य सिंह की बड़ी पुत्रवधू हैं। यूं कहें उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी भी हैं। 28वर्षों तक लगातार हिसुआ का प्रतिनिधित्व करने वाले आदित्य सिंह राबड़ी सरकार में पशुपालन राज्य मंत्री बने थे। दंबग नेता के रूप में उनकी पहचान थी। 2005 के अक्टूबर का चुनाव वे भाजपा उम्मीदवार अनिल सिंह से हार गए थे। उसके बाद वे चुनाव नहीं लड़े। अपने जीवन काल में ही बड़ी बहू नीतू को उत्तराधिकारी बनाते हुए 2010 में कांग्रेस का टिकट दिलाकर चुनाव लड़वाया था।