बोधगया, जागरण संवाददाता। गुरुवार को मगध विश्‍‍‍वविद्यालय (Magadh University) और भारत-जापान लेबोरेटरी, कीयो विश्‍‍‍वविद्यालय जापान (India-Japan Laboratory, Keio University) के बीच शैक्षणिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा। इसको लेकर गुरुवार को समझौता पत्र (Memorandum of Understanding) पर ऑनलाइन हस्‍ताक्षर किया गया।  एमओयू पर कीयो विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो राजीव शाह तथा मगध वि‍वि के कुलसचिव (Registrar) डॉ जितेंद्र कुमार ने हस्ताक्षर किए।

सांस्‍कृतिक मूल्‍यों का भी होगा संवर्धन

इस अवसर पर मगध विवि के कुलपति (Vice Chancellor of MU) प्रो राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच केवल ज्ञान और बौद्धिक संपदा का आदान-प्रदान ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों का संवर्धन भी होगा। भारत और जापान ने अलग-अलग तरह की प्राकृतिक एवं मानवकृत आपदाओं का सामना किया है। ऐसे में इनसे निपटने के तरीके और नीतियों का आदान-प्रदान होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में वैश्विक स्तर पर अध्ययन-अध्यापन, शोध और नवाचार की आवश्यकता है।  उसके लिए मगध विश्वविद्यालय और इंडिया जापान लैबोरेटरी, कीयो यूनिवर्सिटीके बीच एमओयू मील का पत्थर साबित होगा।

कीयो विवि ने जापान को दिए कई पीएम और उद्योगपति 

डॉ राजीव शाह ने कहा कि 1858 में स्थापित कीयो विश्‍वविद्यालय ने जापान को कई प्रधानमंत्री और उद्योग जगत के कई सफल प्रबंध निदेशक के साथ-साथ कई उद्योगपति दिए हैं इसका हमें गर्व है। मगध विवि बुद्ध की पावन भूमि बोधगया में अवस्थित है जो जापान के लिए महत्वपूर्ण है। जापान ने दुनिया में सबसे ज्यादा आपदा झेली और अपने तरीके से इससे निपटने में सफलता प्राप्त की है। भारत के प्रधानमंत्री पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि भारत और जापान के बीच ज्ञान विज्ञान, बौद्धिक संपदा, तकनीक और अनेक बिंदुओं को साझा करेंगे। यह तब हुआ था जब भारत के पीएम मोदी जापान आए थे। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो निजी क्षेत्रों का भी सहयोग लिया जाएगा और इसकी पहल कियो विश्वविद्यालय जापान करेगा। मौजूदा समय में कीयो विश्वविद्यालय में 34 हजार छात्र विभिन्न संकायों में अध्ययनरत हैं।

द्विपक्षीय अनुसंधान की दिशा में भी प्रभावी 

इस समझौते के सूत्रधार इराइज इंडिया के सीईओ ब्रिगेडियर डीके खन्ना ने कहा की भविष्य में दोनों विश्वविद्यालय विभिन्न विषयों पर अत्याधुनिक द्विपक्षीय अनुसंधान करने तथा उच्च शिक्षा सहयोग को बढ़ावा देने में कारगर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यह एमओयू विभिन्न विषयों में हुए विकास और संयुक्त प्रकाशन एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन के क्षेत्र में अत्यंत कारगर सिद्ध होगा।