सासाराम : रोहतास] ब्रजेश पाठक। रोहतास जिला के बिक्रमगंज के रहने वाले गुरुजी कुछ अन्य गुरुओं से अलग हैं। इनके यहां तामझाम नहीं बल्कि पढ़ाई के बल पर सपना देखने वाले छात्र ही आते हैं। पढ़ाई के बीच कोई शुल्क नहीं बल्कि पूरा होने के बाद बिना गुरुदक्षिणा लिए ये किसी को नहीं छोड़ते। गुरुदक्षिणा भी सिर्फ एक रुपया। नाम है रजनी कांत श्रीवास्तव उर्फ मैथेमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव। अबतक 540 निर्धन परिवार के छात्र इंजीनियर व अन्य सरकारी सेवक बन सपने को साकार कर चुके हैं। खेल-खेल में जादुई तरीके से गणित पढ़ाने का उनका तरीका लाजवाब है। कबाड़ की जुगाड़ से प्रैक्टिकल कर गणित सिखाते हैं। इनके द्वारा चलाया जा रहा नाइट क्लासेज छात्रों को भी रास आती है। गुगल ब्वाय कौटिल्य के भी ये गुरु रह चुके हैं। कई रिकार्ड इनके नाम पर दर्ज है।

कमजोर छात्राें को भी पढ़ाते

बिक्रमगंज में अपने पुस्तैनी छोटे से मकान में आरके श्रीवास्तव रहते हैं। इस मकान से अब गरीब छात्रों को उम्मीद की पंख लगती है। कई अति साधारण व कमजोर छात्रों के लिए उम्मीद की एक किरण भी यहीं दिखती है। महान गणितज्ञ रामानुजम और वशिष्ठ नारायण ङ्क्षसह को अपना आदर्श मानने वाले रजनीकांत श्रीवास्तव कहते हैं कि मेधावी छात्रों की परीक्षा के माध्यम से चयनित कर कोई इंजीनियर डाकटर बना सकता है। गुरू की अग्निपरीक्षा तो तब होती है जब अति साधारण व कमजोर छात्रों में शिक्षा की भूख जगा उसे मुकाम तक पहुंचाए। अबतक 540 गरीब तथा विपरीत परिस्थितियों से लडऩे वाले छात्र यहां से इंजीनियर व अधिकारी बनकर निकले हैं। संघर्ष के बूते

खुद टीबी बीमारी के कारण नहीं बने थे इंजीनियर :

बचपन में पिता पारसनाथ लाल की मौत के बाद घर की तंगहाली के बीच वे टीबी से ग्रसित हो गए। बड़े भाई शिवकुमार श्रीवास्तव का सपना था कि वे इंजीनियर बनें लेकिन बीमारी के कारण आइआइटी की प्रवेश परीक्षा नहीं दे पाए। इंजीनियर बनने का सपना चकनाचूर हो गया। बाद में बड़े भाई की मौत ने भी उन्हें झकझोर कर रख दिया। मन में टीस थी कि वे इंजीनियर बन नाम और पैसा कमाते लेकिन मां-भाभी का संबल मिला और अपने जैसे मजबूर बच्चों को आगे बढ़ाने का विचार आया। माध्यम बना गणित। गरीब बच्चों की फी चुकता करने की मजबूरी खुद से जानते थे। वे यह भी जानते थे कि बच्चे महंगी फी देने में मजबूर हैं लेकिन बिना फी दिए पढ़ेंगे भी नहीं। लिहाजा गुरु दक्षिणा रखा एक रुपये। यह गुरुदक्षिणा सफल होने पर हर हाल में जमा करना अनिवार्य बनाया। रजनीकांत श्रीवास्तव कहते हैं कि अपने जैसे उन बच्चों को पढ़ा-लिखा कर काफी संतुष्टि मिलती है, जो मार्गदर्शन नहीं मिलने से प्राय: पिछड़ जाते हैं। मैं रास्ता बताने वाला हूं, गुरु नहीं। यह तो विद्यार्थियों का प्रेम है, जो मेरा इतना सम्मान कर मैथमेटिक्स गुरू बना दिए हैं।

मैथ्‍स गुरु आरके श्रीवास्‍तव अपने सर्टिफिकेट दिखाते हुए। जागरण फोटो।

कई गरीब छात्रों को मिला आइआइटी व एनआइटी में दाखिला :

रजनीकांत की पाठशाला से निकलकर कोचस के रहने वाले आदित्य कुमार 2020 में जेईई मेंस की परीक्षा पास कर एनआइटी पटना में, इसी वर्ष बिक्रमगंज के रहने वाले शशांक कुमार ने आइआइटी जोधपुर में, बिक्रमगंज में सिक्योरिटी गार्ड विनोद पाल का बेटा सोनू कुमार ने एनआइटी में, बिक्रमगंज के ही रहने वाले अनिष कुमार ने आइआइटी में, अनुपम कुमार आइआइआइटी इलाहाबाद में तथा यश राज, सुमित, रूपा, संदीप, शुभम, सत्यम, अंकित, अभिषेक ने जेईई एडवांस 2020 की परीक्षा पास कर आइआइटी व एनआइटी में नामांकन लिए हैं।

सफल छात्रों की है लंबी फेहरिस्त :

आरके श्रीवास्तव अपने सफल छात्रों की तरक्की देख काफी उत्साहित हैं। कहते हैं कि इससे असीम खुशी मिलती है तथा उनके अभियान को भी बल मिलता है। बताते हैं कि बिक्रमगंज कोर्ट में स्वतंत्र टाइपिस्ट के पुत्र प्रतीक कुमार को पढ़ा इंजीनियर बनाया। अब वह पेटीएम में प्रबंधक के पद पर कार्यरत है। राजेश कुमार बिहार सरकार में आइटी मैनेजर, किसान के पुत्र विवेक व अमन एनडीए के माध्यम से सेना में अधिकारी, ङ्क्षप्रस कुमार इंजीनियङ्क्षरग कालेज में सहायक प्राध्यापक, दावथके रहने वाले दीपक कुमार होंडा कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर, बिक्रमगंज के नोनहर की रहने वाली साक्षी कुमारी टीसीएस में, सब्जी विक्रेता का पुत्र श्रीराम बिजली विभाग में सहायक अभियंता, मुंजी के नवीन पुष्कर बिहार सरकार में इंजीनियर, कोआथ-मझौली निवासी किसान वीर बहादुर स्वरूप के पुत्र मुकेश स्वरूप ने एनआइटी सिल्चर से बीटेक किया। वे आज ओएनजीसी अंकलेश्वर (गुजरात) में अधिकारी हैं। पान विक्रेता राजकुमार साह के पुत्र सचिन, दावथ डिहरा के किसान के पुत्र विवेक ने इंजीनियरिग की पढ़ाई कर अच्छे पैकेज पर नामचीन कंपनियों में काम कर रहे हैं। रजनीकांत से पढ़कर ही आइआइटी गुवाहाटी में गौरव, एनआइटी अगरतला में अक्षत राज, साक्षी कुमारी, मनीष आदि बीटेक करने पहुंचे हैं।

एक रुपया गुरुदक्षिणा देना है आवश्यक :

रजनीकांत बताते हैं कि अबतक उनसे पढ़ाई कर 540 छात्र सफल हुए हैं। सभी ने आकर एक रुपया गुरुदक्षिणा दिया है। गुरु की महिमा और महत्व छात्रों की सफलता से ही है। जब छात्र उन्हें गुरुदक्षिणा देते हैं तो उनका मन सम्मान से भर जाता है।

अबतक मिल चुका है कई अवार्ड :

रजनीकांत को पाइथागोरस प्रमेय को बिना रुके 52 अलग-अलग तरीके से सिद्ध करने के लिए वर्ल्‍ड बुक आफ रिकार्ड लंदन में नाम दर्ज है। लगभग 12 घंटे 450 से अधिक बार नाइट क्लास में पढ़ाने के लिए गोल्डन बुक आफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में नाम दर्ज है। इन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व सांसद शत्रुघ्न ङ्क्षसहा, राज्यसभा के पूर्व सदस्य आरके श्रीवास्तव, योग गुरु बाबा रामदेव, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत व हरिश रावत समेत कई लोगों से पुरस्कार प्राप्त हुआ है। गेस्ट फैकल्टी के रूप में भी कई संस्थानों में गणित विषय को पढ़ाएं हैं। गुगल ब्वाय कौटिल्य के भी ये गुरु रह चुके हैं।

 

Edited By: Sumita Jaiswal