भगवान विष्णु के श्रीचरणों का आप भी कर लीजिए दर्शन, माघी पूर्णिमा पर विष्णुपद धाम में हुआ शृंगार
Gaya News माघी पूर्णिमा पर गया के श्री विष्णु पद मंदिर में दिखा विहंगम नजारा भगवान विष्णु के श्री चरणों का हुआ श्रृंगार भक्तों ने अलौकिक दर्शन कर लिया आनंद दुनिया भर के हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ गयाजी धाम

गया, कमल नयन। हां, पत्थर में भी भगवान होते हैं। बस, केवल दिल में आस्था और विश्वास का वास हो। जिसका भी विश्वास जिस रूप में हो, उसी रूप में भगवान की अनुभूति संभव है। यही भाव गया के विष्णु पद में देखने को मिलता है। विष्णुपद के मुख्य गर्भगृह में बड़ी शिला पर भगवान श्री विष्णु के दायां चरण अवलोकित है। गर्भगृह के मध्य में चांदी के अष्ट कोणीय कुंड में भगवान का श्रीचरण 18 ईंच लंबा बताया जाता है। गौर करने पर श्री हरि के चरण शंख, चक्र,गदा, पद्म, ध्वज, अंकुश आदि समाहित है। जिसका दर्शन सुबह से शाम तक श्रद्धालु करते हैं और अपना सिर नवाते हैं।
गयापाल समाज के युवाओं ने दिखाया उत्साह
भगवान विष्णु के चरण चिह्न का प्रतिदिन संध्या कालीन बेला में शृंगार किया जाता है। शनिवार की शाम माघी पूर्णिमा के अवसर पर विशेष शृंगार किया गया। काफी आकर्षक ढंग से अष्ट कोण के साथ साथ श्री चरण के शृंगार में युवाओं को सात घंटे का समय लगा। यह शृंगार फूल और फल से किया गया। जो श्रीविष्णुपद प्रबंध कारिणी समिति की देखरेख में गयापाल समाज के युवाओं ने किया।
हर रोज शाम को होता विष्णु चरणों का शृंगार
वैसे तो विष्णु चरण के शृंगार की परंपरा चली आ रही है। जो प्रतिदिन संध्या बेला में होती है। यह शृंगार विष्णु के प्रिय चंदन और तुलसी से होता है। इसकी छाप सफेद मलमल पर लोग श्रृद्धा से ले जाते और अपने अपने घरों में पूजा के दौरान नमन करते हैं..नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
पूर्णिमा तिथि को होती है फल्गु की महाआरती
श्री विष्णुपद मंदिर पवित्र फल्गु नदी के पश्चिमी तट पर बसा है। नदी में जल का बहाव पश्चिम दिशा होकर है। मानो फल्गु श्रीचरण को पखारती उत्तर की ओर बलखाती चली जाती है। लेकिन फल्गु के भक्ति भाव की यह क्रीड़ा पिछले डेढ़-दो दशक से बंद है। फल्गु रुठ गई और पानी सूख गया। फिर फल्गु को मनाने का दौर चल रहा है। पूर्णिमा तिथि को फल्गु महाआरती होती है। कल रात देवघाट पर आरती हुई। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
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