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    ननौक गांव में उपजा हरा धनिया बंगाल के सियालदह मंडी की बन रही शान, बंगाल के सियालदह से आते हैं कारोबारी

    By Prashant Kumar PandeyEdited By:
    Updated: Wed, 27 Oct 2021 05:07 PM (IST)

    जिला मुख्यालय से 10 किमी. दूर ननौक गांव हरी सब्जी उत्पादन में अपनी पहचान बनाए हुए है। अभी गांव में 20 एकड़ में धनिया की खेती हो रही है। बंगाल के सियालदह से कारोबारी आकर धनिया खरीदकर ले जा रहे। किसानों को प्रति किलो 120 रुपए तक आमदनी हो रही।

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    गांव में धनिया की खूब होती है खेती 

     विनय कुमार पांडेय, गया: जिले के मानपुर प्रखंड का ननौक गांव। यहां सालों भर हरी सब्जी उपजती है। अभी यहां हरा धनिया की हरियाली देखते बन रही है। करीब 20 एकड़ में धनिया लगी हुई है। बाजार भी बढ़िया है। किसानों को अच्छी रेट मिल रही है। यहां हर दिन दोपहर बाद से हरा धनिया के खरीदार टोकरी व वाहन लेकर पहुंच जाते हैं। ननौक गांव में उपजा हरा धनिया पश्चिम बंगाल के सियालदह मंडी, कोलकाता मंडी तक पहुंच रहा है। इन मंडियाें में ननौक गांव के हरा धनिया की खूब मांग है।

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    चालीस दिनों में प्रति कट्ठा पांच से छह हजार मुनाफा

    खेती को लेकर किसान जागरूक हैं। कब कैसे मुनाफा कमाना है, कहां बाजार अच्छा मिलेगा। इन सबकी जानकारी रखते हैं। सितंबर शुरू होते ही खेत में क्यारी बनाकर धनिया की बुआई हो जाती है। अक्टूबर के पहले हफ्ते से बाजार में पहुंचने लायक हो जाता है। किसानों को अपनी खेत पर ही प्रति किलो 100 से 110 रुपए तक हरा धनिया का रेट मिल जाता है। नवंबर से धनिया का रेट गिरने लगता है। किसान अभिषेक शर्मा, अनिरूद्ध प्रसाद, विशुनदेव प्रसाद बताते हैं कि 40 दिन की खेती में बढ़िया मुनाफा मिल जाता है। बीज बुआई से लेकर खाद डालने, बीमारी से बचाने, सिंचाई प्रबंधन हर चीज का ख्याल रखते हैं।

     एक टोकरी में 35 से 40 किलो तक आता है धनिया

    सियालदह मंडी के खरीदार टोकरी में भरकर हरा धनिया ले जाते हैं। पत्तियां मुरझाए नहीं इसके लिए बर्फ में पैककर ले जाया जाता है। किसानों को खुशी इस बात की है कि सबकुछ कैश मिल जाता है। हरा धनिया उखड़ने के बाद उसी खेत में आलू की बुआई हो जाती है।

     35 साल पहले मुखिया ने धनिया बेचकर खरीदी थी राजदूत

     गांव में धनिया की शुरूआती खेती के पीछे दिलचस्प वाक्या है। लालदेव महतो मुखिया ने 35 साल पहले हरा धनिया की खेती शुरू की थी। आईडिया बगल के गांव बीथो से मिला था। मुखिया जी बताते हैं कि पहली बार धनिया बेचकर चार हजार की आमदनी की थी। जो उस समय पूरे इलाके में चर्चा बनी थी। उसी रुपए से एक राजदूत बाइक खरीदी थी। वे अभी भी धनिया की खेती करते हैं। इस साल 36 कट्ठा में धनिया लगाया है। वह धनिया की खेती को समय से करने पर सबसे मुनाफा वाली खेती बताते हैं।