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गयाजी में 40 लाख से अधिक ने किया तर्पण, मंत्री विजय सिन्हा की दो टूक- खुले में नहीं होगी मांस-मछली की बिक्री

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:12 PM (GMT+05:30)

गयाजी में इस वर्ष पितृपक्ष मेला में 40 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे, जिनके लिए सुरक्षा रिस्ट बैंड और एआई आधारित भाषा अनुवाद जैसी नई सुविधाएं शुरू की गईं।

गयाजी पितृपक्ष मेले में 40 लाख तीर्थयात्री

गयाजी पितृपक्ष मेले में 40 लाख तीर्थयात्री

HighLights

  1. इस वर्ष 40 लाख से अधिक तीर्थयात्री गयाजी पितृपक्ष मेला में पहुंचे।

  2. बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षा रिस्ट बैंड की नई व्यवस्था की गई।

  3. एआई आधारित भाषा अनुवाद सुविधा से तीर्थयात्रियों को काफी मदद मिली।

जागरण संवाददाता, गयाजी। पितृपक्ष मेला में इस वर्ष 40 लाख से अधिक तीर्थयात्री गयाजी पहुंचे और अपने पितरों का तर्पण किया। बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आगमन के बीच पहली बार बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षा रिस्ट बैंड तथा देश-विदेश से आए यात्रियों की सुविधा के लिए एआइ आधारित भाषा अनुवाद की व्यवस्था की गई।

अब तक 12 हजार से अधिक बच्चों और बुजुर्गों को रिस्ट बैंड पहनाया जा चुका है, जबकि 90 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने भाषा अनुवाद सुविधा का लाभ उठाया है।

पितृपक्ष मेला के समापन की ओर बढ़ने के बीच कृषि मंत्री सह प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को जिला अतिथि गृह में जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर और वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार के साथ मेला व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि मेला के शेष दिनों में भी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर तीर्थयात्रियों से मिल रहे फीडबैक के आधार पर व्यवस्थाओं को बेहतर करें।

मंत्री ने आवासन स्थलों की नियमित जांच कराने और वहां साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय समेत सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने नगर आयुक्त को शहरी और मेला क्षेत्र में खुले में मांस-मछली की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित कराने को कहा।

उन्होंने कहा कि पितृपक्ष मेला में लाखों तीर्थयात्रियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। शेष दिनों में भी उन्हें निर्बाध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए।

मंत्री ने बताया कि इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री गयाजी पहुंचे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को परिजनों से बिछड़ने की स्थिति में पहचान और पुनर्मिलन में सुरक्षा रिस्ट बैंड उपयोगी साबित हो रहा है।

वहीं, स्थानीय भाषा नहीं समझने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एआई आधारित भाषा अनुवाद सुविधा से संवाद आसान हुआ है।

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