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East Champaran: परिस्थितियों की भट्ठी में तपकर सोना बनीं सोनम, दारोगा बनने की अनोखी कहानी

Published: Tue, 03 Nov 2026 06:30 AM (IST)

पूर्वी चंपारण की सोनम राज ने विपरीत परिस्थितियों का सामना कर बिहार पुलिस में दारोगा बनकर अपने गांव और परिवार ...और पढ़ें

माता-पिता व बहन के साथ सोनम। सौजन्य स्वयं

माता-पिता व बहन के साथ सोनम। सौजन्य स्वयं 

HighLights

  1. सोनम राज बनीं बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर।

  2. पिता के सहयोग से विपरीत परिस्थितियों पर पाई विजय।

  3. पूर्वी चंपारण की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा स्रोत।

आदित्य कुमार सिंह, पताही (पूर्वी चंपारण)। परिस्थितियां चाहे जितनी विपरीत रहीं, सोनम ने उन पर राज किया। निश्चय को शस्त्र बना परिस्थितियों की भट्ठी में खुद को तपाया तब जाकर सोना बनी और मन की इच्छा पूरी हुई।

सोने पर सुहागा तब हुआ जब सोनम डबल स्टार वाली वर्दी पहनकर उस माटी पर पहुंची, जो कभी नक्सली घटनाओं के लिए चर्चित रही। पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड के रतनसायर गांव की बेटी सोनम राज ने संघर्षों को अपना बनाया और उनका सामना किया।

बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर (दारोगा) बनकर जब पहली बार नौकरी पर जाने से पहले घर लौटी तो न केवल अपने परिवार का संबल बनीं। बल्कि पूरे गांव और प्रखंड के लोगों को गर्व करने का अवसर दिया। इस बेटी की सफलता इलाके की वैसी बेटियों के लिए प्रेरणा बनी जो आर्थिक तंगी और सामाजिक बंदिशों के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाती।

खेती-किसानी कर पिता ने पूरा की बेटी इच्छा

सोनम के पिता उमेश चंद्र सिंह खेती-किसानी के सहारे परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। मां मंजू सिंह ने भी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रयास किया।

सीमित आमदनी के बावजूद बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का सपना कभी कमजोर न होने दिया। आर्थिक चुनौतियों के बीच सोनम ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और मेहनत के दम पर वर्ष 2021 में बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनी। वर्तमान में वह पटना के सुल्तानगंज थाना में तैनात हैं।

मोतिहारी से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तक का सफर

सोनम की शिक्षा का सफर मेहनत और लगन की मिसाल है। मोतिहारी से मैट्रिक, बोकारो से इंटरमीडिएट और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। सेल्फ स्टडी पर विशेष ध्यान देते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2021 में दारोगा बनकर उन्होंने अपने सपनों को साकार किया।

बेटी की सफलता के पीछे माता-पिता के विश्वास और त्याग की ताकत रही। पिता ने बेटियों को भरोसा दिलाया था कि जरूरत पड़ी तो खून बेचकर भी उन्हें उनके मुकाम तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

छोटी बहन वकील बनने की तैयारी में

सोनम की सफलता का असर परिवार के अन्य बच्चों पर भी दिखा। उनकी छोटी बहन रूपम राज वकील बनने की तैयारी कर रही हैं, जबकि भाई राहुल रंजन भी जीवन में कुछ बेहतर करने के लिए प्रयासरत हैं। ग्रामीण कहते हैं- बेटियों को अवसर और परिवार का सहयोग मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं।

बेटियों की शादी में जल्दबाजी नहीं

सोनम राज का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार बेटियों की शिक्षा की तुलना में उनकी शादी को अधिक प्राथमिकता देते हैं। कम उम्र में शादी की चिंता के कारण बेटियों की पढ़ाई और उनके सपने पीछे छूट जाते हैं। माता-पिता को इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। बेटियों को भी बेटों के समान शिक्षा, अवसर और आगे बढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए।

शिक्षा केवल नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर बनने, अपने अधिकारों को समझने और समाज को नई दिशा देने का रास्ता भी है। सही मार्गदर्शन, शिक्षा और प्रोत्साहन मिले तो हर घर में सोनम जैसी बेटियां अपने परिवार और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं।

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