पूर्वी चंपारण की प्रियंका ने रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरित होकर CISF में देश सेवा का सपना किया साकार
पूर्वी चंपारण की प्रियंका कुमारी ने रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरित होकर देश सेवा का सपना देखा और सीआईएसएफ में कांस्टेबल ...और पढ़ें

पूर्वी चंपारण की प्रियंका कुमारी। सौजन्य-स्वजन
HighLights
प्रियंका कुमारी ने सीआईएसएफ में कांस्टेबल पद पर योगदान दिया।
रानी लक्ष्मीबाई के साहस से प्रेरित होकर देश सेवा का प्रण लिया।
पूर्वी चंपारण की बेटी की सफलता से परिवार और गांव गौरवान्वित।
आदित्य कुमार सिंह, पताही (पूर्वी चंपारण)। पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड की पदुमकेर निवासी प्रियंका बचपन से ही मेधावी रही। बचपन से ही उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई के साहस व संघर्ष की कहानी सुनी। उनके बारे में पढ़ा और जाना। तभी प्रण किया कि ज्ञानार्जन से प्रेम करेंगी और देश सेवा में अपना योदान देंगी।
यहीं कारण है कि किसान परिवार में जन्मीं प्रियंका कुमारी ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) में कांस्टेबल के पद पर ही पहली सीढ़ी के तौर पर योगदान देकर देश सेवा का अपना सपना साकार किया है।
अब देश सेवा के संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहीं। उनकी सफलता से परिवार के साथ गांव के लोग भी गौरवान्वित हैं। स्वजन बताते हैं- प्रियंका को बचपन से ही कुछ अलग करने की इच्छा थी।
स्वतंत्रता आंदोलन में महान वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की देशभक्ति से प्रेरित होकर उनके मन में भी देश की सेवा करने का जज्बा पैदा हुआ। आज वह अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रहीं।
गांव में पालन-पोषण व शिक्षा का आरंभ
प्रियंका की प्रारंभिक शिक्षा पटुमकेर गांव में ही हुई। ग्रामीण परिवेश में रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ने का सपना संजोए रखा।
दसवीं और इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए मोतिहारी का रुख किया, जहां से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के इस सफर में उन्होंने अपने लक्ष्य को हमेशा प्राथमिकता दी। अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और वह सीआइएसएफ में कांस्टेबल के पद पर चयनित होकर देश सेवा से जुड़ गईं।
पिता को बेटी की उपलब्धि पर गर्व
प्रियंका के पिता हरेंद्र कुमार झा ने बताया कि उनकी पुत्री बचपन से ही सीआइएसएफ में जाने के लिए उत्सुक थी। वह हमेशा कुछ अलग करने और देश के लिए योगदान देने की बात करती थी। परिवार ने उसकी इच्छा को समझा और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि बेटी की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।
लोगों की बातों की परवाह किए बिना लक्ष्य पर रहा ध्यान
प्रियंका के दादा यगदानंद झा ने बताया कि पोती अपनी तैयारी करती थी तो गांव के कुछ लोग तरह-तरह की बातें किया करते थे। इससे अलग प्रियंका ने लोगों की बातों पर ध्यान देने की बजाय अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी।
वह अपनी तैयारी और भविष्य को लेकर गंभीर रही। उसने धैर्य और मेहनत के साथ आगे बढ़ना जारी रखा। बेटियों को कभी भी बेटों से कम नहीं आंकना चाहिए।
बेटियां हर क्षेत्र में निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका
प्रियंका का मानना है कि बेटियां आज समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, राजनीति और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं।
बेटियों को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वे बेटियों की रुचि को समझें और उनके सपनों को पूरा करने में सहयोग करें।
हमें बेटियों पर गर्व है। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। एक समय था, जब बेटियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल होता था, लेकिन आज उन्हें अवसर मिलने लगा है तो वे हर क्षेत्र में अपनी अलग छाप छोड़ रही हैं। बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।
- शुभम कुमार
एक बेटी की सफलता के पीछे उसके परिवार का विश्वास और उसका अपना संघर्ष होता है। माता-पिता को बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सपनों को समान महत्व देना चाहिए। आर्थिक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, उन्हें बेटियों के आगे बढ़ने में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति से बेटियां अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
-अभिषेक यादवआज बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में आगे निकल रही हैं। उनकी सफलता पूरे समाज की प्रगति का प्रतीक है। शिक्षा के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों में भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्रतिभा के सामने गरीबी भी बाधा नहीं बन रही है। प्रियंका इसकी मिसाल है। अन्य लड़कियों को भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की जरूरत है।
-सीमा देवीबेटियों को आगे बढ़ाने की शुरुआत परिवार से ही होनी चाहिए। पढ़ाई हो या खेलकूद, बेटियों को लड़कों के बराबर अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति होती है और वे जो ठान लेती हैं, उसे हासिल करने के लिए पूरी मेहनत करती हैं। बेटियों को आगे बढ़ाने के प्रति समाज का नजरिया अब सकारात्मक हो रहा है।
-पिंटू कुमार
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