सावधान! क्षारीय हो रही है खेतों की मिट्टी
मोतिहारी रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण पूर्वी चम्पारण की मिट्टी की हालत खराब होने लगी
मोतिहारी रसायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के कारण पूर्वी चम्पारण की मिट्टी की हालत खराब होने लगी है। यह मिट्टी अब क्षारीय होने लगी है। जानकारों की राय में मिट्टी का पीएच मान अब 8 से उपर दर्ज किया जा रहा है। यह स्थिति बेहद ¨चताजनक है। क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए किसानों को उर्वरकों के प्रयोग से पहले मिट्टी की जांच करा लेना चाहिए। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध संस्थान (आत्मा) का इस बात पर बल है कि रसायनिक खाद की जगह जैविक खाद व हरी खाद का प्रयोग श्रेयस्कर है।
क्या है पीएच मान
पीएच खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य जांच का पैमाना है। सभी उर्वरक हर प्रकार की जमीन के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। यदि मिट्टी का पीएच मान 6 से कम है तो अम्लीय है। जबकि 8 से अधिक होना क्षारीय स्थिति है । उर्वरक भी अम्लीय, क्षारीय व उदासीन प्रकृति के होते हैं । किस खेत में कौन से खाद की दरकार है, यह जांच से ही स्पष्ट हो सकता है । मिट्टी के क्षारीय होने से न सिर्फ उर्वरा शक्ति क्षीण होती है बल्कि मिट्टी उसपर भी हो सकती है। मिट्टी के अम्लीय होने पर क्षारीय उर्वरक जैसे कैलशियम नाईट्रेट, सोडियम नाईट्रेट, क्यूरेट ऑफ पोटाश देना उचित रहेगा। जबकि क्षारीय स्थिति में अमोनिया सल्फेट, अमोनिया फास्फेट, अमोनिया क्लोराइड का उपयोग किया जाना चाहिए। यूरिया उदासीन प्रकृति का उर्वरक है।
हरी खाद पीएच को नियंत्रित करती है
हरी खाद जैविक खद के अन्तर्गत एक महत्वपूर्ण अवयव है । हरी खाद के उपयोग का मुख्य उद्देश्य वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करना एवं मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाना है । सघन कृषि पद्धति तथा असंतुलित रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग के कारण दिन प्रति दिन मिट्टी की उर्वरता में ह्रास हो रहा है, क्योंकि रसायनिक उर्वरकों के व्यवहार से पौधों के लिए आवश्यक 16 पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती है । हरी खाद न केवल सारे पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है बल्कि मिट्टी में हार्मोन तथा विटामिन की मात्रा भी बढ़ाता है । साथ ही खर पतवार की वृद्धि को भी रोकता है। हरी खाद के रूप में मूंग एवं ढैंचा का प्रयोग किया जा सकता है।
वर्जन
जिले में मिट्टी का पीएच मान 8 से भी अधिक है। उर्वरकों के प्रयोग के लिए मिट्टी जांच जरूरी है। कृषकों को सलाह दिया जाता है कि वे जैविक खाद का प्रयोग करें। इससे पीएच मान संतुलित रहता है।
लक्ष्मण प्रसाद
परियोजना निदेशक आत्मा
पूर्वी चम्पारण
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।