निर्धारित लक्ष्य खोलता है सफलता के द्वार
मानव जीवन में लक्ष्य का निर्धारण बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है।
दरभंगा । मानव जीवन में लक्ष्य का निर्धारण बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। अंग्रेजी में कहा गया है गोल इज ही मोस्ट पावरफुल मोटिवेटर अर्थात लक्ष्य का निर्धारण मनुष्य को सफलता के मार्ग पर ले जाता है तथा लक्ष्य को प्राप्त कर मनुष्य सुखी जीवन जीता है। बिना लक्ष्य निर्धारित कर मनुष्य दिशाहीन हो जाता है। पुन: अंग्रेजी में कहा गया है प्ले योर वर्क एंड वर्क योन प्ले अर्थात लक्ष्य को निर्धारित कर उस दिशा में सार्थक प्रयास करें जिससे आपको लक्ष्य की प्राप्ति हो सके। द्रोणाचार्य के अनेक शिष्य थे परंतु अर्जुन उनका सबसे प्रिय शिष्य था। इसका कारण अर्जुन द्वारा लक्ष्य का निर्धारण तथा उसकी प्राप्ति हेतु समर्पण था। इसके परिणाम स्वरूप अर्जुन विश्व प्रसिद्ध धनुर्धर बना सका। लक्ष्य का निर्धारण सुखी जीवन के लिए परमावश्यक है। लक्ष्य की प्राप्ति में अनेक विघ्न बाधाएं आती है। ¨कतु यदि इच्छा शक्ति ²ढ हो तो सभी विघ्नबाधाओं को पार कर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। लक्ष्य का निर्धारण किसी दबाव में नही होना चाहिए। रूचि-अभिरूचि के अनुसार यदि लक्ष्य का निर्धारण हो और समर्पण भाव से उसे प्राप्त करने की कोशिश की जाय तो अवश्य ही सफलता प्रापत होगी। प्रत्येक कार्य की सिद्धि उद्यम से होती है मनोरथ से नही। संस्कृत में कहा गया है।
डा. मदन कुमार मिश्र
प्राचार्य, दरभंगा पब्लिक स्कूल, दरभंगा
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फोटो : 4 डीअरजी 2
पृथ्वी पर कई जीव रहते हैं परंतु मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो बुद्धि के बल पर इस धरती पर अपने से भी अधिक बलशाली जीवों पर शक्तियों पर परिस्थितियों पर अपना नियंत्रण रख स्वयं को सर्वोपरि रखता है। क्षमतावान होने पर भी यदि मनुष्य अपना लक्ष्य निर्धारित करके चले तो वह कभी दिशाहीन होकर मार्गच्युत नही हो सकता। अर्जुन को केवल मछली की आंख दिखाई दे रही थी जिसके परिणाम स्वरूप वह आगे चलकर अपने गुरु का विश्वासपात्र धनुर्धर बना। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपना लक्ष्य निर्धारित कर ले और हमेशा हर चुनौती को स्वीकार कर लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर रहे तो कोई शक्ति उसके मार्ग की बाधा नहीं बन सकती। लक्ष्य प्राप्ति के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। परंतु लक्ष्य प्राप्त होने पर सुखी जीवन का आनंद भी प्राप्त होता है।
रमा लाल
शिक्षिका
दरभंगा पब्लिक स्कूल, दरभंगा।
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फोटो : 4 डीअरजी 3
जीवन में लक्ष्य निर्धारित होना बहुत आवश्यक होता है। बिना लक्ष्य निर्धारित किए हम सुखी जीवन की कल्पना तक नही कर सकते। जब तक किसी व्यक्ति को पता होता है कि उसे क्या करना है तो वह बडी सरलता से योजनाबद्ध तरीके से उस काम को कर पाते हैं और सफलता हासिल करते है। लक्ष्य विहीन व्यक्ति पशु के समान भटकते है। जीवन में लक्ष्य पता हो तो हम कठिन से कठिन काम को कर पाने में सफल होते है। अत: हम अगर अपने लिए खुशी जीवन चाहते हैं तो हमें हमारा लक्ष्य तय करना होगा और हम निश्चित ही सभी कठिनाईयों को सभी बाधाओं को पार करते हुए मंजिल को पाएंगे।
प्रतिभा स्मृति
शिक्षिक
दरभंगा पब्लिक स्कूल, दरभंगा।
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फोटो : 4 डीअरजी 4
हमारे जीवन में लक्ष्य का बहुत बड़ा महत्व है। बिना लक्ष्य के सबका जीवन नीरस होता है। यहां तक कि जानवरों के जीवन का भी एक लक्ष्य होता है-भोजन पाना। यदि इंसान के जीवन में कोई लक्ष्य हो तो उसका जीवन सुखमय होता है। अगर हमारा कोई लक्ष्य हो तो हम यूं ही इधर उधर नही भटकते। हमें अपने लक्ष्य का निर्धारण अपने रूचि के अनुसार करना चाहिए। बहुत बच्चों के अभिभावक बच्चों पर दबाव डालते हैं कि उन्हें डाक्टर, इंजीनियर या अफसर ही बनना चाहिए। इस तरह बच्चे वह पेशा किसी भी प्रकार अपना तो लेते हैं परंतु आगे जाकर असफल हो जाते हैं और जो अभिभावक अपने बच्चों को उनके रूचि के अनुसार लक्ष्य चुनने को कहते है तो वो बच्चा आगे जाकर निश्चय ही सफल होते है और उनका जीवन सुखी होता है। अत: हमें अपने लक्ष्य का निर्धारण सोच समझ कर करना चाहिए।
राकेश कुमार चौधरी
कक्षा 8
दरभंगा पब्लिक स्कूल दरभंगा
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फोटो : 4 डीअरजी 5
हमारे जीवन बिना किसी लक्ष्य के निरर्थक हैं। जिसके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं होता, उन्हें अपने जीवन से कोई मोह नहंी होता और वे गलत रास्ते में चल पड़ते हैं। अगर हमारे जीवन में कोई लक्ष्य होगा तभी हमारे अंदर उस लक्ष्य केा प्राप्त करने की जिज्ञासा होगी और हम उस लक्ष्य को प्राप्त कर अपने जीवन को सुखी बना सकेंगे। इस कारण सुखी जीवन के लिए लक्ष्य निर्धारण आवश्यक है। बचपन से ही हमारे जीवन में कोई न कोई लक्ष्य होते हैं परंतु वे लक्ष्य बहुत छोटे होते है और धीरे धीरे किशोरावस्था में वे लक्ष्य बहुत बड़े हो जाते हैं।
अदिति
कक्षा 10
दरभंगा पब्लिक स्कूल, दरभंगा।
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फोटो : 4 डीअरजी 6
सुखी जीवन के लिए अनेक तत्वों की आवश्यकता होती है। हमें अपने भविष्य में सुखी जीवन के लिए आज से ही लक्ष्य निर्धारण करना होगा क्योंकि हमारे भविष्य कासंबंध हमेशा हमारे वर्तमान समय से ही होता है जैसे सारे रिश्ते सुशीलता से और सहनशीलता निभाना। हमें सभीसदस्यों के प्रति अपने रंगों में मिठास भरे अमृत जैसा दिल रखना चाहिए। हमें हमेशा अपने क्रोध और घमंड पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि इन्हीं तत्वों से मनुष्यों के रिश्तों में दुर्बलता आती है। हमें सुखी जीवन के लिए घमंड एवं क्रोध को त्यागकर सदमार्ग का चयन करना चाहिए। वास्तविक में जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए मार्ग का दर्शन किया वह व्यक्ति ही सुखी व्यक्ति है।
तेजस गोयल
कक्षा 10
दरभंगा पब्लिक स्कूल दरभंगा।
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