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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : अब बच्चे इस भाषा में भी कर सकेंगे पढ़ाई, सरकार का विशेष फोकस; बनाई जा रही डिक्शनरी

International Mother Language Day आज यानी कि 21 फरवरी को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को पढ़ाने के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी अपेक्षाकृत अधिक कारगर साबित होती है। इसके मद्देनजर मैथिली शब्दावली की डिक्शनरी बनाई जा रही है। इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है।

By Prince Kumar Edited By: Mukul KumarPublished: Wed, 21 Feb 2024 07:00 AM (IST)Updated: Wed, 21 Feb 2024 07:00 AM (IST)
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस : अब बच्चे इस भाषा में भी कर सकेंगे पढ़ाई, सरकार का विशेष फोकस; बनाई जा रही डिक्शनरी
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर

प्रिंस कुमार, दरभंगा। क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को पढ़ाने के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी अपेक्षाकृत अधिक कारगर साबित होती है। पिछले साल बिहार के दरभंगा जिले के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान, रसायन शास्त्र, पत्रकारिता विषयों की शब्दावली मैथिली भाषा में तैयार की गई थी।

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इन विषयों की तीन से चार हजार मूल शब्दों की शब्दावली को मैथिली भाषा में तैयार किया गया था। मैथिली शब्दावली की डिक्शनरी बनाई जा रही है। इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। शब्दकोश की विभागीय मंजूरी मिलने के साथ ही मैथिली भाषा में पाठ्यक्रम निर्माण भी शुरू हो जाएंगे।

बच्चों को मैथिली भाषा में शिक्षा प्रदान की जाएगी

भारतीय भाषा समिति दिल्ली के मुख्य शैक्षणिक समन्वयक प्रो. अवधेश कुमार मिश्र बताते हैं कि मैथिली में राजनीति विज्ञान, रसायन शास्त्र, पत्रकारिता के अलावा अन्य विषयों के भी शब्दकोश तैयार होने हैं। इसकी तैयारी चल रही है। क्षेत्रीय भाषा में प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मैथिली भाषा में शिक्षा प्रदान की जाएगी।

बता दें कि भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की ओर विधान की अष्टम अनुसूची में शामिल भाषाओं के विकास को लेकर क्षेत्रीय भाषाओं में शब्दावली तैयार की जा रही है।वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रो. गिरीश नाथ झा के नेतृत्व में इस कार्य के लिए एक समिति भी बनाई गई थी।

इसमें भारतीय भाषा समिति दिल्ली के मुख्य शैक्षणिक समन्वयक प्रो. अवधेश कुमार मिश्र, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के सहायक निदेशक डॉ. शहजाद अहमद अंसारी, विशेषज्ञ के रूप में बिहार उच्चतर शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष कामेश्वर झा शामिल हैं।

इससे पहले भी एमएलएसएम कालेज, दरभंगा के रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेम मोहन मिश्र सीएन बैनवेल और एलिन द्वारा लिखी पुस्तक ''फंडामेंटल प्रिंसिपल्स आफ मालीक्यूलर स्पैक्ट्रोस्कोपी'' की मैथिली में अनुवाद कर चुके हैं।

अष्टम अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में बन रही शब्दावली

मैथिली सहित संविधान के अष्टम अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं के विकास के लिए शब्दावली तैयार की जा रही है। भाषा विशेषज्ञों ने बताया कि नई शिक्षा नीति में निचले स्तर की पढ़ाई के माध्यम के लिए मातृभाषा स्थानीय भाषा के प्रयोग पर जोर दिया गया है।

इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़े रखते हुए उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है। अपनी स्थानीय भाषा में बच्चे को पढ़ने में आसानी होगी और वह जल्दी सीख पाएंगे।

छोटे बच्चे घर में बोले जाने वाली मातृभाषा या स्थानीय भाषा में जल्दी सीखते हैं, यदि स्कूल में भी मातृभाषा का प्रयोग होगा तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा और वे जल्दी सीख पाएंगे और उनका ज्ञान बढ़ेगा।

इसके साथ ही शिक्षा प्रणाली में भारतीय भाषाओं को शामिल करने का एक उद्देश्य उन्हें सहेजना और मजबूत बनाना है। शिक्षा में स्थानीय भाषा शामिल करने से लुप्त हो रही भाषाओं को नया जीवनदान मिलेगा और बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत देश के विभिन्न हिस्सों में बोली जाने वाली क्षेत्रीय भाषा प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा देना अनिवार्य किया गया है। बताया गया है कि क्षेत्रीय भाषा में बच्चों को पढ़ाने से उनकी आकलन एवं समझ क्षमता के साथ ही जिज्ञासु प्रवृत्ति में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि होती है।

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