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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मिथिला की उपेक्षा निंदनीय

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Published: Sun, 13 Nov 2011 08:20 PM (IST)

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दरभंगा, निसं : लना मिथिला विवि स्नातकोत्तर मैथिली विभाग की अध्यक्षा डॉ. वीणा ठाकुर ने बिहार गीत में मिथिला की उपेक्षा को निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि माता जानकी की जन्मस्थली मिथिला जनक, याज्ञवल्क्य, गौतम, अहल्या, मंडन मिश्र, भारती, वाचस्पति, महाकवि लखिमा आदि विभूतियों की भी जननी रही है। महाकवि विद्यापति एवं बाबा यात्री-नागार्जुन सरीखे विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार यहां हो चुके हैं जिनसे बिहार का भी परिचय है। यहां की कला-संस्कृति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सूबे को विशिष्ट पहचान दिलाती है। बावजूद इसके बिहार गीत में मिथिला की चर्चा तक नहीं होने से प्रतीत होता है कि जानबूझ कर इसकी उपेक्षा की गई है। डॉ. ठाकुर ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि बिहार गीत में संशोधन कर मिथिला को भी उसमें समुचित जगह दी जाए।

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