बक्सर : नवरात्रि स्नान को लेकर रामरेखाघाट पर गुरुवार की तड़के श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ जुटी हुई थी। हालांकि, कमोबेश यह स्थिति शहर के लगभग सभी प्रमुख गंगा घाटों पर बनी हुई थी। इस दौरान मां के भक्तों ने पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और मां भगवती की आराधना में सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये ‌र्त्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते., मंत्र का उच्चारण करके श्रद्धा व विश्वास के साथ नौ दिनी अनुष्ठान का संकल्प लिया।

दरअसल, इस मंत्र के उच्चारण से मनुष्य अपने जीवन काल में भय एवं बाधा रहित होकर समस्त सुखों को प्राप्त करता है। धर्म ग्रंथ व पुराणों के अनुसार नवरात्रि माता भगवती की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है और यदि प्रतिदिन इस मंत्र का उच्चारण किया जाए तो अधिक से अधिक सफलता प्राप्त होती है। बतौर आचार्य अमरेंद्र कुमार मिश्र उर्फ साहेब पंडित- वैसे तो माता भगवती आदिशक्ति हैं और इनके अनन्त रूप हैं। लेकिन, प्रधान नौ रूपों में नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को अभिजीत मुहुर्त में शैलपुत्री की मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा की गई। दूसरे दिन शुक्रवार को मां ब्रह्माचारिणी की पूजा होगी।

इधर, नवरात्रि को लेकर सड़कों पर सुबह से ही चहल-पहल बढ़ गई थी। दरअसल, पूजा स्थल की साफ-सफाई के बाद लोगों ने गंगा का रुख कर लिया। जहां पतित पावनी गंगा में स्नान किए जाने के बाद भक्त जलभरी कर लौटे। इनमें सबसे अधिक संख्या महिलाओं की थी। जो कोरोना संक्रमण से भयमुक्त हो आस्था कि डुबकी लगा रही थीं। मौके पर राधिका देवी, प्रेमा देवी, हेमलता पांडेय- जिस शक्ति के हाथ में जगत की उत्पत्ति, पालन और प्रलय तीनों व्यवस्थाएं हो तो उसकी उपासना में भय कैसा? हालांकि, कोरोना संक्रमण की सुरक्षा के अनुपालन संबंधित मामले में फिलहाल नागरिक और कुछेक प्रशासनिक कारिदों के द्वारा भी इस पहल की अनदेखी हो रही है। घर, मंदिर एवं पूजा पंडालों में हुई कलश स्थापना

जासं, बक्सर : दशहरा महोत्सव में सार्वजनिक स्थलों पर भी भव्य पंडाल का निर्माण कर देवी पूजा होती है। हालांकि, कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रशासन की ओर से इस बार कुछ नियमावली दी गई है। जिसका पालन करते हुए भक्तों को मातारानी की आराधना करने को कहा गया है। जिसके तहत मेन रोड, अमला टोली, पीपी रोड आदि कुछेक संस्थाओं ने फिलहाल भव्य रूप तो नहीं दिया हुआ है। लेकिन फिलहाल संक्षेप तरीके से कलश की स्थापना कर पूजन कार्य किया जा रहा है। इसके तहत गुरुवार को घरों के अलावा मंदिरों में भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश की स्थापना की गई। धार्मिक मान्यता में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर जब सक्रिय हो जाते हैं तब उसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है और ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में आदिशक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की पूजा की जाती है।

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