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    Ganga Dussehra 2025: 5 या 6 जून कब है गंगा दशहरा? जानें इस दिन स्नान-दान का महत्व

    Updated: Wed, 28 May 2025 12:40 PM (IST)

    बक्सर में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने का अनुमान है। गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा और निर्जला एकादशी पर व्रत का विशेष महत्व है। आचार्य अमरेंद्र कुमार शास्त्री के अनुसार इन दोनों अवसरों पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है जिससे सुख भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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    पांच जून को गंगा दशहरा, छह को निर्जला एकादशी

    जागरण संवाददाता, बक्सर। पांच जून दिन गुरुवार को गंगा दशहरा एवं इसके अगले दिन शुक्रवार को निर्जला एकादशी है।धर्म शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि में ही मां गंगा का आविर्भाव स्वर्ग से भूमि पर हुआ था। अगले दिन शुक्रवार को निर्जला एकादशी है। धर्मानुरागी इसे भी साल की सबसे बड़ी एकादशी मानते हैं। इन दोनों ही मौके पर शहर के प्रसिद्ध रामरेखा घाट, नाथ बाबा घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर स्नान-दान को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

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    5 जून को गंगा दशहरा

    प्रसिद्ध कर्मकांडी आचार्य अमरेंद्र कुमार शास्त्री उर्फ साहेब पंडित ने बताया कि दशमी तिथि चार तारीख की रात्रि 1:41 बजे शुरू हो रही है, जो पांच की रात्रि 3:13 बजे तक रहेगी। इस दिन बटुक भैरव जयंती एवं सेतुबंधे रामेश्वरम प्रतिष्ठा दिवस भी है।

    गंगा दशहरा का महत्व

    धर्म शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है की ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि में ही राजा भगीरथ के प्रयास से मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस दिन श्रद्धालु भक्तों को मां गंगा की स्तुति, स्तोत्र व उनकी कथा का श्रवण करना चाहिए। मां गंगा की विधि-विधान पूर्वक पूजन-अर्चना किए जाने से सभी प्रकार के शोक-दोष का निवारण हो जाता है।

    6 जून को निर्जला एकादशी

    दूसरी ओर, निर्जला एकादशी व्रत छह तारीख दिन शुक्रवार को है। इसे भीमसेनी एकादशी व्रत स्मार्तानाम से भी जाना जाता है। वैष्णवनाम एकादशी का व्रत शनिवार को करेंगे। बता दें कि निर्जला एकादशी को साल की 24 एकादशियों में सबसे बढ़कर फल देने वाली समझी जाती है।

    मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से समस्त एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त हो जाता है। आचार्य ने कहा कि निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत संयम साध्य है। वैसे तो ज्येष्ठ के दोनों एकादशी व्रत में अन्न खाना वर्जित है। लेकिन धर्म ग्रंथों में इस व्रत को संपूर्ण सुख, भोग और मोक्ष देने वाला बताया गया है।