आरा। धनुपरा स्थित हजरत सैयद बाबा बेकरार शाह वारसी रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर दो दिवसीय सालाना उर्स सोमवार से शुरु हुआ। इसमें दूर-दराज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शाम में 7.51 बजे बाबा बेकरार शाह वारसी के कुल शरीफ से उर्स की शुरुआत हुई। रात 8.30 बजे से लंगर शुरु हुआ। तदोपरांत रात 10.30 बजें से महफिले समां में तकरीर, नातपाक व कव्वाली पेश किया गया। अपनी तकरीर में गया से तशरीफ लाये मुफ्ती ख्वाजा दुर्रानी मिस्बाही ने कहा कि जो अल्लाह व रसूल के हुक्मों पर अपनी जिन्दगी कुर्बान कर देता है, उसकी हुकूमत दुनिया व आखिरत दोनों जहां पर हो जाती है। इंसान दुनिया में अपनी ताकत व दौलत की बदौलत सिर्फ इंसानों पर हुकूमत कर सकता है। लेकिन जो अल्लाह वाले होते हैं वह इंसानों और उनके दिलों पर हुकूमत करते हैं। यही वजह है कि उनके परदा हो जाने के बावजूद हमारे दिलों पर इतनी हुकूमत है कि हम उनके दरबार में हाजिर होते हैं और नजराने अकीदत पेश करते हैं। नातखां कारी खुश्तर सहसरामी ने नात पाक पेश किया- जिसने देखा हो गया सैदा तेरा वारिस पिया/रब ने ऊंचा कर दिया रूतबा तेरा वारिस पिया। वहीं, जो मुस्तफा ने चाहा वह मौला बना दिया/काबे को सारी दुनिया का किबला बना दिया/नाते रसूले पाक का एजाज देखिए/यसरब में पांव रख दिया तैबा बना दिया। नात पाक पेश कर अकीदतमंदों को खूब झूमाया। इनके अलावे गया से तशरीफ लाए भोलू वारसी ने भी नात पाक पेश किया। वहीं कोलाकाता के सुफियाना कव्वाल अब्दुल क्यूम वारसी ने कव्वाली पेश किया। वारसी परिवार के सचिव रामापति ओझा ने बताया कि मंगलवार की अहले सुबह 4.14 बजे दादा पीर हजरत सैयद दीवाना शाह वारसी रहमतुल्लाह अलैह का कुल शरीफ होगा। पूर्वाह्न 11.09 बजे बाबा के पीर हजरत सैयद जानी शाह वारसी रहमतुल्लाह अलैह का कुल शरीफ होगा। वहीं अपराह्न 2 बजे बाबा बेकरार शाह वारसी के मजार को गुसल कराया जाएगा। संध्या 4 बजे स्थानीय बाबू बाजार स्थित अरुण वारसी के निवास से चादर जुलूस निकाला जाएगा, जो गोपाली चौक, धरहरा होते हुए बाबा के मजार पर पहुंचेगा। मगरिब की नमाज के बाद चादरपोशी और रात 8 बजे लंगर शुरु होगा। रात 9 बजे से मिलाद शरीफ और रात 10.30 बजे से कव्वाली का कार्यक्रम होगा। अहले सुबह 4.13 बजे वारसी सिलसिले के पीर हाजी हजरत सैयद वारिस अली शाह देवा शरीफ, लखनउ का के कुल शरीफ के साथ यह आयोजन संपन्न होगा।

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