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    आरा कोचिंग यार्ड में लगा जोन का पहला ‘स्मार्ट मेंटेनेंस डिपो’, 6 की बजाय 4 घंटे में हो रही ट्रेनों की सफाई

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 04:36 PM (IST)

    आरा में पूर्व मध्य रेल ने पहला स्मार्ट मेंटेनेंस डिपो बनाया है। इससे ट्रेनों के रखरखाव और जांच में दो घंटे की बचत हो रही है। प्रोजेक्ट मशीन लर्निंग डिपो नामक इस परियोजना से रेलवे को अधिक ट्रेनों के परिचालन में मदद मिलेगी जिससे यात्रियों को फायदा होगा। आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके कम समय में ट्रेनों की मरम्मत की जा रही है।

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    आरा कोचिंग यार्ड में लगा जोन का पहला ‘स्मार्ट मेंटेनेंस डिपो’। (जागरण)

    जागरण संवाददाता, आरा। पूर्व मध्य रेल के दानापुर मंडल अंतर्गत आरा कोचिंग डिपो में जोन का पहला ‘स्मार्ट मेंटेनेंस डिपो’ स्थापित किया गया है। तकनीक पर आधारित इस डिपो में ट्रेनों के रखरखाव और सफाई एवं जांच में औसत दो घंटे की समय की बचत हो रही है।

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    आमतौर पर यार्ड में यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेनों के रखरखाव में छह घंटे का वक्त लगता है, जो इस डिपो में चार घंटे में पूरी हो रही है। एक महीने पहले तकनीक को स्थापित किया गया है और यहां सफल होने के बाद रेलवे दानापुर और राजेन्द्रनगर में भी इस तकनीक को विकसित करने पर काम कर रहा है।

    इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ‘प्रोजेक्ट मशीन लर्निंग डिपो’ नाम दिया गया है। दरअसल, विभिन्न रूटों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने में उसका रखरखाव भी मायने रखता है।

    ट्रेनों के रखरखाव में समय कम लगने का मतलब है कि रेलवे के लिए ज्यादा ट्रेनों के परिचालन के विकल्प बढ़ेंगे, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा।

    दानापुर मंडल के एडीआरएम आधार राज के अनुसार, फिलहाल इसका सफल प्रयोग आरा डिपो से चल रहा है और चार जोड़ी प्राइमरी मेंटेनेंस व तीन राउंड ट्रिप ट्रेनों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

    कैसे काम करती है तकनीक

    ट्रेन जब अपने गंतव्य स्थान तक फेरे पूरे कर लेती है तो यार्ड में रखरखाव के लिए आती है। आरा कोचिंग यार्ड में ब्रेक सिलेंडर प्रेशर टेस्टिंग, एयर पाइप लाइन लीकेज की अल्ट्रा साउंड जांच, हाइड्रोस्टैटिक वॉटर लेवल टेस्टिंग और पावर कार जेनरेटर लोड मॉनिटरिंग लेजर और हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से की जा रही है।

    इनसे कपलर, स्प्रिंग, पहियों व कोच के अंडरगियर की बारीक जांच हो रही है। कोचिंग यार्ड के एक कर्मचारी ने बताया कि कि हॉट एक्सल अलर्ट सिस्टम, अलार्म चेन पुल लोकेशन ट्रैकिंग और गैस सेंसर से दुर्गंध की पहचान में लेजर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।

    पहले इन सभी की जांच कोचिंग कर्मियों को हर बोगी की अलग-अलग करनी होती थी। रेल अधिकारी का कहना है कि आरा कोचिंग डिपो से मिली यह सफलता आने वाले समय में जोन के अन्य रेल डिपो के लिए आदर्श साबित होगी।