पुण्यतिथि पर याद किए गए लोक कलाकार भिखारी ठाकुर
भिखारी ठाकुर की 51वी पुण्य तिथि पर भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले पटेल बस पड़ाव स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर लोक कला की प्रासंगिकता विषय पर आधारित एक संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई।

आरा (भोजपुर) । भिखारी ठाकुर की 51वी पुण्य तिथि पर भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के बैनर तले पटेल बस पड़ाव स्थित भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच पर लोक कला की प्रासंगिकता विषय पर आधारित एक संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। अध्यक्षता कवि जनार्दन मिश्र ने एवं संचालन भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान के अध्यक्ष सह श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने किया। विषय प्रवर्तन करते हुए पत्रकार सह वरिष्ठ रंगकर्मी अरुण प्रसाद ने कहा कि जमाने के हर दौर में लोक कला की उपयोगिता प्रासंगिक रही है। जनता के हितों को लेकर की गई इसकी शुरूआत अब बाजार का भी एक सशक्त माध्यम बनती जा रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने गुलामी के दौर में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की रचनाओं को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ शुरू किए सांस्कृतिक आंदोलन का कारगर हथियार बताया। साथ ही वर्तमान समय में लोक कला को और समृद्ध करने की आवश्यक्ता बताई। वक्ताओं ने भोजपुरी भाषा को सरकारी मान्यता दिलाने से लेकर उसे और सशक्त बनाने पर बल दिया। साथ ही इस मामले में स्थानीय जन प्रतिनिधियों की उपेक्षापूर्ण नीति की निदा करते हुए भोजपुरी भाषा से जुड़े संगठनों की संयुक्त पहल की आवश्यक्ता बताई। संबोधित करने वालों में डा. अरविद राय, कृष्ण यादव कृष्णेंदु, भरत सिह सहयोगी, स्वामी विक्रमादित्य पाल, राजेंद्र राय, गायक धनी पांडेय दिनेश प्रसाद सिन्हा, डा. कुमार शीलभद्र, बाल्मीकि शर्मा आदि शामिल थे। इस मौके पर अमरेश कुमार सिंह, डा. सत्येंद्र कुमार विष्णू, रामजी प्रसाद, राम लखन प्रसाद समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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