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    देश में सबसे उच्च तकनीक से लैस होगा गया बिहार का यह केवीके, दूसरे राज्य के किसानों को भी मिलेगा लाभ

    By Dilip Kumar ShuklaEdited By:
    Updated: Fri, 04 Feb 2022 11:29 PM (IST)

    बिहार कृषि विश्वविद्यालय के गया कृषि विज्ञान केंद्र का कायाकल्प शीघ्र बदलने वाला है। 21 करोड़ रुपये की लागत से देश की सबसे उच्च तकनीक से लैस केवीके बनने जा रहा है जो बहुआयामी किसानोपयोगी होगा। अन्‍य राज्‍यों के किसानों को भी लाभ होगा।

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    बिहार कृषि विश्‍वविद्यालय के अंतर्गत गया केवीए का कायााकल्‍प होगा।

    ललन तिवारी, भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अधीन मानपुर गया कृषि विज्ञान केंद्र का कायाकल्प होने वाला है। 21 करोड़ की लागत से देश की सबसे उच्च तकनीक से लैस केवीके बनने जा रहा है जो बहुआयामी किसानोपयोगी होगा। यह बिहार का पायलट प्रोजेक्ट होगा। इसके सफल संचालन के बाद सभी केवीके को इसी प्रकार उच्च तकनीक से लैस किया जाएगा।

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    ऐसे होगा खास

    केवीके की आधारभूत संरचना में डिजिटल इंडिया का समावेश होगा। केवीके में हाइटेक आडिटोरियम, बीज प्रोसेस‍िंंह प्लांट, गोदाम, बाउंड्रीवाल, विज्ञानियों का आवास, पंप हाउस, इंपेलिमेंट शेड आदि सहित कृषि विज्ञान केंद्र को सुसज्जित बनाया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय को राशि मिल गई है। बीएयू के प्रसार शिक्षा निदेशक डा. आरके सोहाने ने बताया कि केवीके में प्रवेश करते ही डिजिटल इंडिया का जहां एहसास होगा, वहीं किसानों को दिखाकर सिखाने की उच्च तकनीक की सिस्टमेटिक व्यवस्था होगी। नई तकनीक से किसान कम जगह, कम समय और कम खर्च में कैसे समृद्ध बनेंगे इसका माडल बनेगा। उन्होंने कहा कि देश में यह कृषि विज्ञान केंद्र अग्रणी रहेगा। दूसरे राज्यों से किसान यहां आकर ज्ञान अर्जन करेंगे। बहुत जल्द काम आरंभ किया जाएगा।

    सनद हो कि गया जिले की खास फसल मशरूम उत्पादन के रूप में सरकार ने चिन्हित की है। इसलिए कृषि विज्ञान केंद्र में मशरूम उत्पादन का माडल, इसके बीज उत्पादन की हाईटेक प्रोसेसिंग प्लांट आदि पर प्राथमिकता के स्तर पर काम किया जाएगा।

    कृषि विज्ञान केंद्र में क्या होता है

    कृषि विज्ञान केंद्र का मूल काम यह है कि विकसित किसानी की नई तकनीक और नई किस्म को विभिन्न प्रकार के प्रसार माध्यमों से किसानों तक पहुंचाए। इसके लिए प्रायोगिक स्थल पर नई तकनीक का माडल विकसित कर किसानों को दिखाकर प्रशिक्षित किया जाता है। उनके खेतों पर भी प्रयोग कर उन्हें नई तकनीक से उत्पादन करा कर दिखाया जाता है। उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है और बाजार तक का ज्ञान दिया जाता है, ताकि बदलते वक्त में किसानी का नया माडल किसान अपनाएं और समृद्ध बनें।

    गया कृषि विज्ञान केंद्र को उच्च तकनीकी से लैस और सुसज्जित किया जाएगा। आधारभूत संरचना को डवलप करने का काम बहुत जल्द आरंभ किया जाएगा, ताकि किसान केवीके से ज्ञानार्जन कर सकें। - डा. अरुण कुमार, कुलपति बीएयू सबौर