भागलपुर [जेएनएन]। राष्ट्र सेविका समिति की बहनें अब संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगी। समिति की बहनों को वर्ग में कई टास्क मिला है, जिसमें सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। महिलाओं को समिति से जोडना, नित्‍य लगने वाली शाखाओं का विस्‍तार करना आदि पर कार्यकर्ताओं का फोकस रहेगा। राष्ट्र सेविका समिति भी राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की तरह कार्य करती है। समिति महिलाओं को संगठित करने का काम करती है। हिन्‍दू संस्‍कृति, हिन्‍दू धर्म, हिन्‍दू समाज की रक्षा करना तथा भारत को विश्‍वगुरु के स्‍थान पर ले जाना समिति का मुख्‍य उद्देश्‍य है। यहां देशभक्ति का भाव उत्‍पन्‍न किया जाता है। चरित्रिक पाठ पढाया जाता है। महिलाओं के लिए लगने वाली समिति की शाखा में आसान, योग, व्यायाम, साधना, प्रणायाम, खेल कूद, दंड, नियुद्ध, समता के अलावा बौद्धिक प्रशिक्षण दिया जाता है। रोज प्रार्थना होती है। अमृत वचन, सुभाषित आदि का पाठ होता है। प्रेरक प्रसंग और महापुरुषों के जीवन को बताया जाता है। 

प्रथम और द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण दो से 17 जून तक मुजफ्फरपुर में हुआ था। जिसमें शिक्षार्थियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्‍तर बिहार प्रांत प्रचारक रामकुमार, उत्‍तर पूर्व क्षेत्रीय कार्यवाह मोहन सिंह, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अरुण ओझा, राष्‍ट्र सेविका सकिति की प्रमुख कार्यवाहिका सीता अन्नदानम सहित कई प्रांत व राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों का मार्गदर्शन मिला।

स्त्रियों में सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और नैतिकता का आचरण समाज और देश हित में हो, इसका विकास राष्ट्र सेविका समिति करती है। इस वर्ग में भागलपुर से भी बहनें गई थीं। मुख्यरूप से नगर कार्यवाहिका कीर्ति कांत, नगर संपर्क प्रमुख श्वेता सिंह, सह नगर कार्यवाहिका लक्ष्मी शाह, सरिता सिंह सहित अन्य बहनें शामिल थी।

राष्ट्र सेविका समिति

राष्ट्र सेविका समिति, भारत की स्त्रियों की एक संस्था है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ही दर्शन के अनुरूप कार्य करती है। किन्तु यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महिला शाखा नहीं है। इसकी स्थापना १९३६ में विजयादशमी के दिन वर्धा में हुई थी। श्रीमती लक्ष्मीबाई केळकर (मौसीजी) इसकी प्रथम प्रमुख संचालिका थीं। विद्यमान प्रमुख संचालिका वं.शांता कुमारी 'शान्तक्का' हैं। राष्ट्रसेविका समिति का ध्येयसूत्र है - 'स्त्री राष्ट्र की आधारशीला है।'

प्रमुख संचालिकाएँ

(१) मावशी लक्ष्मीबाई केळकर, (संस्थापिका, अक्टूबर १९३६ से नवम्बर १९७८ तक आजीवन)

(२) सरस्वती आपटे 'ताई आप्टे' (१९७८ से १९९४ तक)

(३) उषाताई चाटी (१९९४ से २००६ तक)

(४) प्रमिला-ताई मेढे (२००६ से १०१२ तक)

(५) वी॰ शान्ताकुमारी 'शान्ताक्का' (वर्ष २०१२ से प्रमुख संचालिका)

 

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Edited By: Dilip Shukla

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