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    Purnia News: कोरोना ले रहा थैलेसीमिया के मरीजों की जान, खून की कमी के कारण दो दर्जन बच्चों ने तोड़ा दम

    By Abhishek KumarEdited By:
    Updated: Mon, 24 May 2021 03:16 PM (IST)

    कोरोना काल में लोग रक्तदान नहीं कर रहे हैं। यह थैलेसिमिया के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। पूर्णिया जिले में 144 थैलेसीमिया के मरीज थे लेकिन अब इसने संख्या घटकर 120 रह गई है। इन मरीजों को खून की कमी के करण काफी परेशानी हो रही है।

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    कोरोना काल में लोग रक्तदान नहीं कर रहे हैं।

    पूर्णिया [राजीव कुमार]। कोरोना थैलेसीमिया पीडि़त मरीजों पर भी कहर बनकर टूटा है। कोरोना काल के दौरान खून की उपलब्धता नहीं होने के कारण खून के अभाव में थैलेसीमिया पीडि़त बच्चे दम तोड़ रहे हैं। कोरोना काल के दौरान पूर्णिया जिले में 24 थैलेसीमिया मरीज असमय काल के गाल में समा गए। पूर्णिया जिले में 144 थैलेसीमिया पीडि़त बच्चे हैं जिन्हें हर माह खून की जरूरत होती है। लेकिन खून के अभाव में 24 बच्चों की मौत के बाद अब यह संख्या घटकर 120 रह गयी है। कोराना काल में आलम यह है कि मार्च 2021 जबसे कोरोना शुरू हुआ पूर्णिया के दो ब्लड बैंक रेडक्रास ब्लड बैंक एवं सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैक से खून गायब है। तीन माह के दौरान किसी स्वंयसेवी संस्था ने रक्तदान शिविर भी इस दौरान आयोजित नहीं किया है। कोराना काल के पूर्व थैलेसीमिया मरीजों को अपने लोगों द्वारा भी रक्तदान कर दिया जाता था। मगर कोरोना काल में इम्यूनिटी बढ़ाने के चक्कर में हर कोई रक्तदान करने से परहेज कर रहा है और इसका खामियाजा थैलेसीमिया पीडि़त मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

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    थैलेसीमिया के जिन बच्चों की खून की कमी से हुई मौत

    कोरोना काल में खून की कमी से थैलेसीमिया पीडि़त जिन मरीजों की मौत खून की कमी से हुई उनमें पूर्णिया के सोनू कुमार पिता विजेन्द्र यादव, दिवाकर कुमार पिता अजीत कुमार भवानीपुर के शिवम कुमार पिता मंटू मंडल, कमर प्रवीण, सरसी निवासी खुशबू कुमारी पिता चंदन यादव शामिल है। इसके अलावा पूर्णिया के ही भवानीपुर निवासी अंकित कुमार, पूर्णिया निवासी मो. शाहिल, जाहिद फजल पिता महबूब आलम, बिजेन्द्र ऋषिदेव नकी अहमद पिता गुलाम हैदर, पीयूष कुमार पिता देवीलाल पासवान, रंजीत कुमार पिता सुबोध कुमार शामिल है।

    क्या कहते हैं परिजन

    थैलेसीमिया पीडि़त बच्चे पीयूष जिसकी मौत हो गयी उसके पिता देवी लाल पासवान कहते हैं की खून के अभाव में उसके बेटे की मौत हो गयी। वे खून के लिए की बार सदर अस्पताल गए लेकिन उन्हें एक यूनिट ब्लड तक नहीं मिला। लाक डाउन के कारण एवं कोरोना के भय से जितने लोगों से अपने बेटे के लिए रक्तदान की गुहार लगाते रहे मगर किसी ने नहीं सुनी। फल मंडी में काम कार परिवार चलाने वाले देवी लाल का पीयूष दो संतानों में सबसे छोटा था।

    मुरसंडा के रहने वाले जाहिद आलम के पिता महबूब आलम कहते हैं की हमारे दो बेटे हैं दोनों ही थैलेसीमिया की मरीज है। इसमें एक की मौत खून के अभाव में जाहिद की हो गयी। खून के लिए वे लगातार सदर अस्पताल एवं रेडक्राल का चक्कर काटते रहे मगर किसी ो उनकी एक ना सुनी और उनके बेटे ने खून के अभाव में दम तोड़ दिया।

    कोरोना काल में रक्त की कमी हुई है, मार्च से ही रेडक्रास एवं ब्लड बैंक में खून की कमी है जिस कारण थैलेसीमिया पीडि़त मरीजों को खून उपलब्ध नहीं कराया जा सका है , रक्त की उपलब्धता होते ही प्राथिमकता के तौर पर इन मरीजों को खून उपलब्ध कराया जाएगा। - एके वर्मा, सिविल सर्जन पूर्णिया

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