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    ओम नम: शिवाय : द्रोपदी ने पांचों पतियों के साथ बिहार के इस शिव मंदिर में किया था रात्रि विश्राम

    By Dilip Kumar ShuklaEdited By:
    Updated: Tue, 26 Jul 2022 03:24 PM (IST)

    ओम नम शिवाय द्रोपदी अपने पांचों पतियों के साथ बिहार खगडि़या के के बाबा फुलेश्वरनाथ शिव मंदिर में रात्रि विश्राम किया था। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं आते हैं। सावन माह में कोसी और अंग क्षेत्र के लोगों का यहां आना होता है।

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    ओम नम: शिवाय : बाबा फुलेश्वरनाथ शिव मंदिर खगडि़या बिहार।

    ओम नम: शिवाय : बिहार के खगडिय़ा-सहरसा और मधेपुरा की सीमा क्षेत्र का प्रसिद्ध बाबा फुलेश्वरनाथ शिव मंदिर, फुलबडिय़ा-बोबिल आस्था व विश्वास का केंद्र है। इसलिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा और अर्चना को आते हैं। संपूर्ण कोसी और अंग क्षेत्र से श्रद्धालु सावन में पहुंचते हैं। खासकर सावन की हर सोमवारी यहां हजारों की संख्या में डाक बम पहुंचते हैं। अगुवानी गंगा तट पर जल भरकर 65 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए डाक बम बाबा फुलेश्वरनाथ मंदिर पहुंच भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करते हैं। मंदिर के बगल में बरसाती नदी चननदह बहती है।

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    मंदिर का इतिहास

    जनश्रुति के मुताबिक यह मंदिर महाभारत कालीन है। पांडव जब अज्ञात वास के दौरान द्रोपदी के संग राजा विराट के यहां विराटपुर जा रहे थे, तो रात्रि विश्राम के लिए फुलेश्वरनाथ मंदिर में ठहरे थे। यहां पूजा अर्चना की थी। पांडवों ने पूजा अर्चना के बाद पांच पौधे मंदिर परिसर में लगाए थे। जिसे पांडू वृक्ष के नाम से जाना जाता है। इस वृक्ष की खासियत है कि इसमें न तो वृद्धि होती है और न ही सूखती है। वृक्षों में सहुरा, बरगद, पीपल, महुआ एवं बेल शामिल हैं। मंदिर से ठीक पूरब चननदह भगवती स्थान मंदिर है।

    मंदिर की विशेषता

    मंदिर में स्थापित अरखा अष्ट धातु की है। ग्रामीणों के सहयोग से 1982 ईस्वी में भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था और विश्वास है। लग्न के समय यहां शादी- विवाह होती रहती है। मुंडन संस्कार भी होता है। लोगों की धारणा है कि जो भी सच्चे दिल से मन्नतें मांगते हैं वे यहां से खाली हाथ नहीं लौटते हैं। महादेव सभी की सुनते हैं। स्थानीय लोग कोई भी शुभ कार्य करने से पहले यहां पहुंच महादेव का दर्शन जरूर करते हैं।

    मंदिर परिसर में अक्षय वट वृक्ष है। चारों ओर का वातावरण रमणीक है। बरसात में चननदह नदी भगवान भोलेनाथ का चरण पखारने को आतुर रहती है।

    इसे फुलबडिय़ा डीह के नाम से भी जाना जाता है। महादेव सभी की सुनते हैं। - गुरु प्रसाद, पुजारी सह संरक्षक।

    यहां तो प्रतिदिन पूजा-अर्चना को श्रद्धालु आते हैं। लेकिन सावन माह में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। खासकर सोमवारी को तो डाक बम का तांता लगा रहता है। मंदिर प्रबंधन समिति श्रद्धालुओं के सेवार्थ दिन-रात लगी रहती है। श्रद्धालुओं को कोई कष्ट नहीं हो इसको लेकर ग्रामीण भी तत्पर रहते हैं। - मनीष कुमार, कोषाध्यक्ष, मंदिर समिति।