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    मनरेगा : कागज पर छील दी घास, तैयार कर दिया डांड़, जांच में पकड़ी गई गड़बड़ी, भागलपुर के पीओ बर्खास्त

    By Dilip Kumar ShuklaEdited By:
    Updated: Fri, 06 May 2022 11:59 PM (IST)

    भागलपुर में मनरेगा के काम में गड़बड़ी पीओ बर्खास्त। दो बार तीन सदस्यीय टीम ने की शाहकुंड प्रखंड में हुई गड़बड़ी की जांच। यहां लगातार मनरेगा कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। जांच में कई आर अनियमितता बरती गई है।

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    भागलपुर में मनरेगा के काम में गड़बड़ी

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड में मनरेगा के काम में गड़बड़ी के बाद कार्यक्रम पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। यह जानकारी जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने शुक्रवार को दिशा की बैठक में दी।

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    मनरेगा के काम में गड़बड़ी को लेकर जिला परिषद अध्यक्ष द्वारा पिछले वर्ष परिवाद पत्र दायर किया गया था। परिवाद पत्र को लेकर 18 जून 21 को उप विकास आयुक्त द्वारा जांच टीम का गठन किया गया था। टीम ने 27 जुलाई और पांच अगस्त को स्थल पर जाकर जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि कागज पर ही काम हुआ और राशि की निकासी कर ली गई। घास छीलकर तालाब बना दिया गया। डांड़ के काम के नाम पर सिर्फ घास छीला गया। जांच रिपोर्ट पिछले साल 16 दिसंबर को उप विकास आयुक्त को सौंपा गया है। जांच टीम ने गड़बड़ी के लिए संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही एवं कार्यविमुखता पर आरोप लगाया है। जांच टीम में अपर अनुमंडल पदाधिकारी, मनरेगा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी व मनरेगा के ही सहायक अभियंता थे। इसके बाद डीडीसी, डीआरडीए निदेशक व मनरेगा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने जांच की। फिर जिलाधिकारी द्वारा प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी से शोकाज किया गया। संतोषजनक शोकाज का जवाब नहीं मिलने के कारण जिलाधिकारी ने बैठक में बर्खास्त करने की बात कही।

    जांच रिपोर्ट में है जिक्र

    डुमराव मुख्य सड़क के किनारे नदी की खुदाई 362921 रुपये हो होनी थी। इस पर 361800 रुपये खर्च किया गया। जांच के क्रम में पाया गया कि योजना स्थल पर सूचना पट्ट नहीं है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नदी में पानी भरा हुआ था। प्रथम दृष्टया योजना में मात्र घास की छिलाई किया जाना प्रतीत होता है। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि योजना में मजदूरों से कार्य नहीं कराया गया। बनामा पुराना बांध से घोबिया कुंड की उत्तरी भाग तक नदी की खोदाई 499957 रुपये से होनी थी, खर्च 408486 रुपये किया गया। जांच के क्रम में नदी में पानी भरा हुआ था। योजना स्थल पर मापीपुस्त के अनुरूप कार्य नहीं पाया गया। प्रथम दृष्टया योजना स्थल पर आंशिक कार्य कराकर ही मजदूरों के खाते में राशि भेज दिया गया। योजना स्थल पर सूचना पट्ट नहीं होना एवं अभिलेख में योजना से संबंधित फोटोग्राफ नहीं होना योजना की पारदर्शिता को प्रभावित करता है।

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    डांड़ की खोदाई में पकड़ी गई गड़बड़ी

    बरियारपुर घाटी से शीतला स्थान तक डांड़ की खोदाई 496671 रुपये से होनी थी, खर्च 316470 रुपये किए गए। जांच के क्रम में देखा गया डांड़ में थोड़ी बहुत घास की छिलाई की गई है। वर्तमान में डांड़ में पानी भरा हुआ था तथा योजना का सूचना पट्ट योजना स्थल पर नहीं पाया गया। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि मिट्टी की खुदाई नहीं की गई है।