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    RSS Chief मोहन भागवत को हम सराहते हैं, उनकी हिंदू राष्ट्र की थ्योरी स्वीकार्य... ओवैसी से इतर मुसलमानों के पैरोकार फखरे आलम ने संघ प्रमुख की शान में कसीदे पढ़े

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 12:45 AM (IST)

    Mohan Bhagwat News राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत देश में शांति और भाईचारे के महत्व को समझते हैं। खानकाह पीर दमड़िया शाह के सजादानशीं मौलाना सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि उनका हालिया बयान सराहनीय है। हिंदू राष्ट्र पर उनकी सोच पर मुस्लिम समाज को कोई आपत्ति नहीं है।

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    Mohan Bhagwat News: फखरे आलम ने कहा, मोहन भागवत देश में शांति और भाईचारे के महत्व को समझते हैं।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। Mohan Bhagwat News खानकाह पीर दमड़िया शाह के सजादानशीं मौलाना सैयद शाह फखरे आलम हसन का मोहन भागवत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। फखरे आलम हसन ने मोहन भागवत के हालिया बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका बयान स्वीकार्य और सराहनीय है। मोहन भागवत ने भारत की उस आत्मा की बात की है, जो हमेशा से इस देश की नींव रही है, अर्थात यहां विभिन्न जातियां, धर्म और समाज के लोग सदियों से एक साथ रहते आए हैं।

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    उनका यह बयान इस बात का प्रतीक है कि हमें आपसी झगड़ों, विवादों और संप्रदायवाद के जहर से बचना होगा, क्योंकि इनसे न तो यह देश प्रगति कर सकता है, न इसकी अखंडता और अस्तित्व शांतिपूर्ण वातावरण में बना रह सकता है। मौलाना ने कहा कि भागवत का यह बयान कि "राम मंदिर की आंदोलन में आरएसएस का साथ था लेकिन अब मथुरा और काशी में अगर आंदोलन चलता है तो उनका साथ नहीं होगा", एक सकारात्मक और सराहनीय बयान है, जिसे हम सराहते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि वे देश में शांति और भाईचारे के महत्व को समझते हैं।

    दूसरी ओर, मोहन भागवत ने यह भी कहा कि भारत में मुसलमान हमेशा से थे, हैं और आगे भी रहेंगे। इस बयान को हम स्वागत योग्य मानते हैं, क्योंकि भारत में लगभग 30 करोड़ मुसलमान रहते हैं और यह संख्या दुनिया के किसी भी मुस्लिम देश से ज्यादा है। यह एक गर्व की बात है।

    जहां तक "हिंदू राष्ट्र" के बारे में मोहन भागवत का बयान है, मौलाना ने कहा कि यहां के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर हिंदू धर्म के मानने वाले लोग ही बैठे हैं। नौकरियां और संस्थान इनके पास हैं। इस दृष्टिकोण से अगर मोहन भागवत हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं तो मुसलमानों को इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह देश लोकतंत्र पर आधारित है।

    उन्होंने कहा कि मुसलमानों को संविधान के तहत पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए और यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार की है। किसी भी ऐसे घटनाक्रम से बचना आवश्यक है, जिससे मुसलमानों को यह महसूस हो कि वे दूसरे दर्जे के नागरिक हैं। इस हीनभावना को खत्म करने के लिए मोहन भागवत को आगे आकर एक रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि मुसलमान अपने सभी अधिकारों का सही तरीके से उपयोग कर सकें।

    मौलाना ने यह भी कहा कि भारत में जो मोब लिंचिंग और बुलडोज़र कल्चर बढ़ा है, उसे तुरंत रोका जाना चाहिए। यह नफरत की पहचान बन चुकी है, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हुई है। मोहन भागवत को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। मौलाना ने कहा कि भारत का माहौल बेहतर होगा, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए देश की प्रगति में योगदान देंगे और कोई भी भेदभाव नहीं होगा।