Bihar Voter List 2025: रेडलाइट एरिया में रहने वाले लोगों का दर्द, कहां से लाएं माता-पिता की पहचान?
बेगूसराय के बखरी में मतदाता सूची के पुनरीक्षण में रेडलाइट इलाके के लोगों को पहचान साबित करने में दिक्कतें आ रही हैं। नए नियमों के अनुसार अलग-अलग जन्मतिथि वाले मतदाताओं के लिए पहचान संबंधी अलग-अलग नियम हैं। 2004 के बाद जन्मे लोगों को माता-पिता दोनों की पहचान देनी है जिससे नट समाज के लोगों और कुछ महिलाओं को परेशानी हो रही है।

उमर खान, बखरी (बेगूसराय)। अनुमंडल क्षेत्र में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कार्य जारी है। इसको लेकर बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को फार्म थमा रहे हैं और उसे निर्धारित समय में भरकर देने की बात कह रहे हैं।
जैसा आयोग का निर्देश है कि 1987 के पहले जन्म लेने वाले मतदाताओं के लिए सेल्फ आईडी प्रस्तुत करना है। 1987 के बाद तथा 2004 के बीच जन्म लेनेवाले मतदाताओं के लिए स्वयं की पहचान के अतिरिक्त माता, पिता में किसी एक की पहचान देनी है।
जबकि 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को अपनी पहचान के साथ माता-पिता दोनों का पहचान उपलब्ध कराना अनिवार्य है। तीसरा नियम यूं तो अधिसंख्य मतदाताओं के लिए परेशानी का सबब बन रहा है, लेकिन इससे सर्वाधिक परेशानी रेडलाइट एरिया के नट समाज के लोगों को रही है।
छिपाई जाती है पहचान
बखरी में ऐसे तीन मोहल्ले नदैल घाट, आशा पोखर और पेट्रोल पंप के पीछे स्थित है। यहां वोटरों की बड़ी संख्या निवास करती है। इस समाज की कड़वी सच्चाई है कि इनके साथ माता की पहचान तो होती है, किंतु बहुतों के पिता अदृश्य होते हैं। इनकी पहचान को छिपाया जाता है।
ऐसे लोग सरकारी कागजात में माता के द्वारा बताए गए पिता के खाने को भरकर अपना काम चलाते हैं। दूसरे इन मोहल्लों में कुछ ऐसे भी बदनसीब लोग, खासकर महिलाएं, जिनकी अपनी पहचान के अतिरिक्त उनके पास कुछ नहीं है, ऐसे लोगों में समाज से सताए या परिवार से तिरस्कृत महिलाएं होती हैं, जो यहां रहकर नाच गान या अन्य दूसरा धंधा कर अपने जीवन की गाड़ी को खींच रही हैं।
पहचान साबित करने की समस्या
अब उन्हें मतदाता गहन पुनरीक्षण का सामना करना पड़ रहा है। 2004 के बाद पैदा हुए या आकर रह रहे मतदाताओं को अपने साथ माता-पिता की पहचान बताना मुश्किल हो रहा है। उनकी बड़ी समस्या यह है कि वे मां की पहचान तो फिर भी दे देंगे, लेकिन पिता की पहचान को कैसे साबित कर पाएंगे।
क्योंकि पिता पक्ष के लोग ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि ऐसे बच्चों को उनकी पहचान मिले। यहां कुछ महिलाएं या बच्चियां ऐसी भी हैं, जो किसी कारण से इस बदनाम गलियों में रह रही हैं।
इनके पास भी खुद की पहचान साबित करने की समस्या है। ऐसे लोग भ्रमित हो विभिन्न तरह की आशंकाओं में जी रहे हैं।
नदैल घाट निवासी सोनू, गुड्डू, रोहित कुमार आदि बताते है की उनके मां बाप नहीं हैं और न ही उनकी कोई पहचान है। ऐसे में वे कैसे साबित करें कि उनके माता-पिता इस मोहल्ले के निवासी हैं।
नीतू देवी कहती हैं कि उनके भी मां-बाप नहीं हैं। न ही उनके नाम की कोई भूमि है। वह कैसे अपना पहचान दे पाएंगी। उनके बच्चों को आगे परेशानी होगी। यह तो महज चंद नाम हैं, ऐसे अनगिनत लोग हैं, जिन्हें अपने मताधिकार छिन जाने का डर सता रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह एसडीएम सन्नी कुमार सौरव ने कहा कि चुनाव आयोग के नए आदेश के मुताबिक फॉर्म जमा करने के समय पहचान से संबंधित कागजातों को जमा करने की वैधता में ढील दी गई है।
अब फॉर्म के साथ कागजात नहीं रहने पर भी फॉर्म जमाकर लिए जाएंगे। बाद में बीएलओ एप के माध्यम से कागजात जमा कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य ही वैध मतदाताओं की पहचान है। क्षेत्र के जो भी मतदाता हैं, उन्हें अपने मताधिकार को साबित करना होगा कि वे कैसे इसकी अर्हता रखते हैं।
इसके लिए आयोग द्वारा कई विकल्प दिए गए हैं। फिर भी अगर कोई अपनी पहचान साबित नहीं कर पाता है, तो उनका मताधिकार छिन जाएगा। इससे अन्य दूसरी योजनाएं प्रभावित नहीं होंगी।
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