औरंगाबाद। देश में सूर्य भगवान के कई मंदिर हैं। सभी के अपने महत्व हैं। इन्हीं में एक है औरंगाबाद के देव में स्थित सूर्य मंदिर। यह कई मामलों में अलग है। इस सूर्य मंदिर को ध्वस्त करने की योजना औरंगजेब ने बनाई थी, लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी। छठ पर्व के दौरान यहां मेला लगता है।

औरंगाबाद से 18 किलोमीटर दूर देव स्थित सूर्य मंदिर करीब एक सौ फीट ऊंचा है। यहां संस्कृति के प्रतीक सूर्यकुंड को गवाह मानकर व्रती जब छठ मैया और सूर्यदेव की आराधना करते हैं, तो उनकी भक्ति देखते ही बनती है। छठ मेले में यहां जाति, संप्रदाय एवं शास्त्रीय कर्मकांड के बंधन समाप्त हो जाते हैं।

राजा ऐल ने बनवाया मंदिर

कहा जाता है कि कुष्ठ रोग ठीक होने के कारण प्रयाग के राजा ऐल ने यहां तालाब एवं मंदिर बनवाया। बाद में उमगा के राजा भैरवेंद्र ने देव, देवकुंड एवं उमगा में विशाल मंदिरों का निर्माण कराया।

काले पत्थर से निर्माण

देव का सूर्य मंदिर काले पत्थरों को तराशकर बनाया गया है। यह अपनी शिल्प कला एवं मनोरम छटा के लिये विख्यात है। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान सूर्य (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के रूप में विद्यमान हैं।

भगवान सूर्य की अद्भुत प्रतिमा

मंदिर के गर्भ गृह के मुख्य द्वार पर बायीं ओर भगवान सूर्य की प्रतिमा व दायीं ओर भगवान शंकर के गोद में बैठे मां पार्वती की प्रतिमा है। ऐसी प्रतिमा सूर्य के अन्य मंदिरों में नहीं देखी गयी है। गर्भ गृह में रथ पर बैठे भगवान सूर्य की अद्भुत प्रतिमा है।

मुख्य द्वार पश्चिमाभिमुख

देश में स्थित सभी सूर्य मंदिरों का द्वार पूरब दिशा में है, परंतु देव सूर्य मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिमाभिमुख है। कहा जाता है कि औरंगजेब अपने शासनकाल में अनेक मूर्तियों एवं मंदिरों को ध्वस्त करता हुआ देव पहुंचा। वह मंदिर तोडऩे की योजना बना रहा था कि वहां भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने ऐसा करने से मना किया, किंतु वह इससे सहमत नहीं हुआ।

औरंगजेब ने कहा कि अगर देवताओं में इतनी हीं शक्ति होती है तो वे मंदिर का प्रवेश द्वार पूरब से पश्चिम कर दें। ऐसा होने पर उसने मंदिर को छोड़ देने की घोषणा की। कहते हैं कि दूसरे ही दिन पूर्व का द्वार पश्चिमाभिमुख हो गया। इससे डरकर औरंगजेब ने मंदिर तोडऩे का अपना इरादा बदल दिया।

छठ पर्व को ले दूर-दूर से आते लोग

देव में स्थित सूर्यकुंड तालाब का विशेष महता है। छठ मेला के समय देव का कस्बा लघुकुंभ बन जाता है। छठ गीतों से यह छोटा सा कस्बा गूंज उठता है। प्रत्येक वर्ष चैत व कार्तिक माह में यहां छठ करने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार को नहाय-खाय के साथ यहां चार दिवसीय छठ पर्व अनुष्ठान आरंभ हो गया है।

Posted By: Kajal Kumari