अरवल। करपी प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय छक्कन बिगहा में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानाध्यापिका रेनू कुमारी ने की। संकुल समन्वयक मनीष कुमार निराला ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति एवं शिक्षा विभाग के सहयोग से यह कार्यक्रम 16 से 21 सितंबर तक चलाया जाएगा। सभी विद्यालयों में छह से 19 वर्ष के बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा अल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी। कृमि संक्रमण की रोकथाम के लिए विद्यालय में नामांकित सभी बच्चों को दवा खिलाना अत्यंत आवश्यक है,ताकि समाज को कृमि मुक्त बनाया जा सके। पेट में क्रीड़ा रहने से बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जिस कारण मानसिक तौर पर बच्चे पूर्ण तरह विकास नहीं कर पाते। क्रीमी एक भयंकर जीवाणु है। जो अनेकों रोगों का कारण बन जाता है। कृमि के कारण बच्चों के मानसिक के साथ-साथ शारीरिक एवं बौद्धिक विकास भी प्रभावित होता है। गुरुवार को विद्यालय में नामांकित सभी बच्चों को निर्धारित अवधि के अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। इस मौके पर विद्यालय के शिक्षक रविशंकर कुमार, नगेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 3.24 लाख बच्चों को दवा खिलाने का रखा गया लक्ष्य : सीएस

जागरण संवाददाता, अरवल:

सिविल सर्जन डा. अरबिद कुमार ने अहियापुर मध्य विद्यालय में बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ किया। सिविल सर्जन ने बताया कि तीन लाख 24 हजार 486 बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम 16 से 21 सितंबर तक चलेगा। पेट में क्रीमी हो जाने के कारण बच्चों को कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। रोग उत्पन्न नहीं हो इसके लिए सभी बच्चों को प्रत्येक छह माह के अंतराल पर अल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खाना है। प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. विद्याभूषण, डीपीएम मुक्ता भारती, डीसीएम रोहित कुमार एवं विद्यालय के शिक्षक उपस्थित थे। सिविल सर्जन ने बताया की एक से दो वर्ष के उम्र वाले बच्चे को आधा गोली चूर्ण बनाकर पानी के साथ चम्मच द्वारा बच्चों को खिलाना है जबकि दो वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों को एक टेबलेट अपने सामने चबाकर खिलाना है। किसी भी हालत में बच्चों को घर ले जाने के लिए टैबलेट नहीं देना है। उन्होंने बताया कि जो बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं उन्हें विद्यालय के शिक्षक अल्बेंडाजोल की गोली अपने देखरेख में खिलाएंगे। जो बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं या आने लायक नहीं है वैसे बच्चों को आंगनबाड़ी के सेविका सहायिका अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर बच्चों को अपने देखरेख में टैबलेट खिलाएंगे।

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