किसी समय किशनगंज से वाराणसी जाती थी सड़क
अररिया: किसी समय प्रसिद्ध डोम सड़क किशनगंज को वाराणसी से जोड़ती थी। अभी भी अररिया और
अररिया: किसी समय प्रसिद्ध डोम सड़क किशनगंज को वाराणसी से जोड़ती थी। अभी भी अररिया और किशनगंज जिले में इस सड़क का अस्तित्व है। इस सड़क से काशी नरेश का भी इतिहास जुड़ता है। लोग बताते हैं कि पुराने समय में काशी को पूर्वाेत्तर भारत से यही सड़क जोड़ती थी।
इसी सड़क की लीक पर भारत-नेपाल सीमा सड़क का निर्माण हो रहा है। फारबिसगंज से झाला चौक तक डोम सड़क को पथ निर्माण विभाग को सौंप दिया गया है। सिकटी के भाजपा विधायक विजय कुमार मंडल बताते हैं कि उनके दादा तिनकौड़ी मंडल के कार्यकाल में काशी नरेश सड़क की मरम्मत कराते थे। उस समय एक आना की मजदूरी पर मजदूर सड़क पर मिट्टी डालते थे। पश्चिम बंगाल से लेकर अररिया की सीमा तक अभी भी सड़क का अस्तित्व है। कालांतर में सड़क का नाम बदल गया। डोम सड़क पहले आरडब्ल्यूडी के अधीन थी। आज यही सड़क आरसीडी के अधीन है। इसी की लीक पर इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड निर्माणाधीन है। फारबिसगंज से झाला चौक तक डोम सड़क की लीक पर आरसीडी दूसरी सड़क बनाने जा रही है। पैक्स अध्यक्ष विनोद कुमार साह, उमेश प्रसाद ¨सह, योगानंद ठाकुर व मुमताज अंसारी ने भी सड़क के इतिहास के बारे में काफी कुछ बताया। वहीं, काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण ¨सह के नाती और भोजपुर स्टेट के निवासी मुखिया हर्षवर्धन नारायण ¨सह ने बताया कि उनके पिता डॉ. अशोक कुमार ¨सह की शादी काशी नरेश की छोटी राजकुमारी से हुई है। आयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा हरिश्चंद्र को स्वर्ण मुद्राओं से क्रय करने वाले काशी निवासी राजा डोम के नाम पर इस सड़क का नामकरण हुआ है। इसे इस इलाके का प्रत्येक व्यक्ति जानता है। कोट मैं किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड में सीओ रहा हूं। किशनगंज प्रखंड में भी सीओ रहा हूं। उस क्षेत्र में डोम सड़क का नाम बच्चा-बच्चा जानता है। बेनूगढ़ का किला भी बेनू महराज से जुड़ा हुआ है जिसका इतिहास किशनगंज के जिला प्रशासन की पत्रिका में प्रकाशित हुआ। डोम सड़क का इतिहास उपेक्षित रह गया। इस पर शोध की जरूरत है।
- रमन ¨सह
सीओ, रानीगंज, अररिया कोट किंवदंती का अपना इतिहास होता है। डोम सड़क का निर्माण काशी नरेश ने कराया था। इसका इतिहास जनमानस में आज भी तरोताजा है। फारबिसगंज डोम सड़क से झाला चौक तक पथ निर्माण प्रमंडल की सड़क बनने की पहल से सरकारी दस्तावेज में भी यह नाम दर्ज हो गया। विधायक विजय मंडल को इस पहल के लिए साधुवाद देता हूं।
- संजय ¨सह
इतिहासकार व प्राचार्य, अररिया कॉलेज, अररिया
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