नई दिल्ली (ऑटो डेस्क)। भारत में अब सेल्फ ड्राइविंग कारों का मार्केट रफ्तार पकड़ रहा है, यह खासतौर पर मेट्रो सिटीज में ज्यादा लोकप्रिय हैं। सेल्फ ड्राइविंग कारों को ज्यादातर ऐसे लोग लेना पसंद जिनको ड्राइव करना पसंद है और साथ ही वो लोग कैब, ट्रेन या फ्लाइट से जाना पसंद नहीं करते, ऐसे में ड्राइव का आनंद लेते हुए ये लोग कार रेंट पर लेते हैं।

सेल्फ ड्राइविंग कार का मतलब कई लोग ये समझते हैं कि कार अपने आप चलेगी लेकिन ऐसा कतई नहीं यह है। अगर आप भी रेंट पर कार लेने का मन बना रहे हैं तो यहां हम आपको कुछ खास टिप्स बता रहे हैं जो आपको सेल्फ ड्राइविंग कार लेने में मदद करेंगे।

ऐसे करें किराया तय: सेल्फ ड्राइविंग के लिए प्रति घंटे के हिसाब से चार्ज किया जाता है। छुट्टियों और वीकेंड के दौरान यह चार्ज बढ़ जाता है। इसके अलावा यह कार फ्यूल के साथ और बिना फ्यूल ऑप्शन के भी रेंट पर दी जाती हैं। बिना फ्यूल वाला ऑप्शन चुनने पर आपको अपने पैसे से गाड़ी में तेल भरवाना पड़ेगा। आप अपने सफर के मुताबिक इनमें से कोई ऑप्शन चुन सकते हैं।

जैसी जरूरत वैसी गाड़ी: मार्किट में हैचबैक, सेडान और एसयूवी गाड़ियां अलग-अलग रेंट पर मिलती है साथ ही कई अलग-अलग आसानी से मिलती हैं। साथ ही अलग-अलग ब्रांड्स के ऑप्शन मिलते हैं। ऐसे में आप अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से गाड़ी का चुनाव कर सकते हैं। अगर आप लंबे सफर पर जा रहे हैं तो मैनुअल ट्रांसमिशन वाली डीजल गाड़ी ले लें। इससे आपका खर्चा कम आएगा। वहीं शहर में घूमने के लिए आप ऑटोमेटिक कार ले सकते हैं।

किराये के अलावा दूसरे चार्जेस पर गौर करें: जब आप सेल्फ ड्राइविंग कार लेते हैं तो इस पर रेंट के अलावा भी कई तरह के चार्जेस लगते हैं। कार प्रोवाइडर्स रिफंडेबल सिक्यॉरिटी डिपॉजिट, डैमेज कॉस्ट समेत दूसरी पैनल्टीज भी लेते हैं। सिक्योरिटी डिपॉजिट अलग-अलग हो सकता है। अगर ड्राइविंग के दौरान आप गाड़ी को कोई डैमेज पहुंचाते हैं तो इसके लिए भी आपको कीमत चुकानी होगी।

रेंट से पहले इन पर भी करें गौर: रेंट पर गाड़ी लेने से पहले गाड़ी के पार्ट्स, इंजन,टायर, स्टैपनी और जैक को भी देख लें क्योंकि इमरजेंसी में यही चीजें आपके काम आएंगी। क्योकिं सफर के दौरान अगर गाड़ी खराब हो जाए तो सारा मज़ा खराब हो जाता है।

 

Posted By: Bani Kalra