नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। भारत में फेस्टिव सीजन चल रहा है, जिसमें कारों की सबसे ज्यादा खरीदारी होती है। ऐसे में अगर आप भी अपने परिवार के लिए कोई कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं और अधिक बजट न हो पाने की वजह से नई कार नहीं खरीद पा रहे हैं तो आप सेकेंड हैंड कार भी खरीद सकते हैं। अगर आप नई कार और सेकेंड हैंड का खरीदने के बीच कंफ्यूज हो रहे हैं कि कौन सी कार खरीदी जाए तो आज हम आपको बता रहे हैं कि सेकेंड हैंड कार खरीदने के क्या फायदे हैं और क्या नुकसान हैं। भारत में सेकेंड हैंड कारों का बहुत बड़ा बाजार है। सेकेंड हैंड कार मार्केट में बिकने के साथ-साथ ऑनलाइन भी बिक रही हैं। देश की कई ऑटोमोबाइल कंपनियां भी सेकेंड हैंड कारों के बाजार में उतर आई हैं तो ऐसे में ग्राहकों के लिए सेकेंड हैंड कारों की बड़ी रेंज उपलब्ध रहती है। यहां हम आपको पूरी डीटेल के साथ बताएंगे कि नई कार खरीदने पर कैसे बेनिफिट्स होते हैं और पुरानी कार खरीदने पर कैसे बेनिफिट्स होते हैं।

सेकेंड हैंड कार खरीदने के फायदे:

कीमत

सेकेंड हैंड कार खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप जिस मॉडल की कार खरीदना चाहते हैं उसे आधे दामों में खरीद सकते हैं। ऐसे में आप धन की काफी बचत कर पाते हैं और आपकी पसंद की कार आप तक उपलब्ध हो जाती है।

डेंट या खरोंच की टेंशन नहीं

अगर आप पहली बार कार खरीद रहे हैं और आपको ठीक से कार चलानी नहीं आती है तो आपके लिए नई की जगह पुरानी कार खरीदना ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है। अगर आप सेकेंड हैंड कार चला रहे हैं और ऐसे में छोटी-मोटी टक्कर लगने से उसमें डेंट पड़ जाए या खरोंच आ जाए तो आपको ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। ऐसे में आप आसानी से ड्राइविंग सीख सकते हैं और उसके बाद नई कार खरीदने के बारे में सोच सकते हैं।

इंश्योरेंस पर कम खर्च

सेकेंड हैंड कार खरीदने के बाद आपको इंश्योरेंस पर कम पैसा खर्च करना पड़ता है।

लोन की टेंशन नहीं

अगर आप कोई नई कार खरीदने के बारे में सोच रहे हैं और आपको आसानी से लोन नहीं मिल रहा है तो आप जितनी डाउन पेमेंट देने के बारे में सोच रहे थे उतनी ही कीमत में कोई सेकेंड हैंड कार खरीद सकते हैं।

सेकेंड हैंड कार खरीदने के नुकसान:

रिसेल वैल्यू

नई कार के मुकाबले सेकेंड हैंड कार की कीमत और वैल्यू अधिक तेजी के साथ कम होने लगती है। ऐसे में अगर आप अपनी सेकेंड हैंड कार को बेचने के बारे में सोचेंगे तो उसकी रिसेल वैल्यू बहुत कम ही होगी।

मेंटेनेंस का खर्च अधिक

नई कार खरीदते हैं तो 4-5 सालों के लिए संतुष्ट हो जाते हैं कि अब इसमें किसी प्रकार की खराबी की चिंता नहीं है। वहीं आप सेकेडं हैंड कार खरीदते हैं तो उसकी बार-बार सर्विस करवाने चिंता बनी रहती है। पहले से ही वह कार काफी चल चुकी है तो उसके कई पार्ट्स खराब हो चुके होंगे या घिस चुके होंगे तो ऐसे में पुरानी कार का मेंटेनेंस काफी ज्यादा होता है।

कम माइलेज

नई कार के मुकाबले पुरानी कार इंजन काफी चला हुआ होता है तो ऐसे में सेकेंड हैंड कार खरीदने के बाद आपको काफी हद तक माइलेज की परेशानी हो सकती है।

वारंटी

सेकेंड हैंड कार खरीदने पर अधिकतर उसके साथ वारंटी नहीं मिलती है, क्योंकि 4-5 साल से अधिक पुरानी होने के बाद उसके साथ कंपनी से मिलने वाली वारंटी खत्म हो जाती है। ऐसे में सेकेंड हैंड कार खरीदने पर यह नुकसान हो सकता है।

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Posted By: Sajan Chauhan

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