नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। यादों के झरोखों को अगर टटोलें तो सामने आती है 80 और 90 के दशक की वो कंपनी, जो एक समय में भारतीय सड़कों पर अपने मॉडल्स के जरिए राज करती थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं Fiat की, जो न सिर्फ एक कार ब्रांड थी, बल्कि भारतीयों की भावनाएं भी इससे जुड़ी हुई थीं। न जाने कितने ही परिवारों की पहली कार इस ब्रांड की थी। किफायती रेंज और शानदार डिजाइन हमेशा से ही Fiat की खासियत रही।

फिर ऐसा क्या हुआ कि भारत में 24 से भी ज्यादा मॉडल्स लॉन्च करने वाली और इतना सफल करोबार करने वाली कंपनी को भारत से अलविदा कहना पड़ा। आज हम Fiat से जुड़ी कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातों के बारे में बताने वाले हैं।

Fiat की शुरुआत

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में फैब्रीका इटालियाना ऑटोमोबाइल टोरिनो (Fiat) का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। इस कंपनी की शुरुआत 1900 में इटली में की गई थी, जहां महज 150 लोगों के साथ इस ब्रांड को शुरू किया गया था और जल्द ही इसने शानदार ग्रोथ की। महज आठ सालों में ही यानी कि 1908 में इसने अपनी पहुंच अमेरिका तक बना ली।

भारत में Fiat ने 1974 में दस्तक दी, जिसमें इसके पहले मॉडल फिएट प्रीमियर पद्मिनी (Fiat Premier Padmini) को लॉन्च किया गया। यह विदेश में पहले से मौजूद Fiat 1100D मॉडल थी, जिसे रिनेम करके भारत में लाया गया था। अपने जबरदस्त लुक की वजह से इस कार ने आते ही भारतीय बाजार में धूम मचा दी और उस समय ऑटो बाजार में राज कर रही Hindustan Ambassador और Contessa की बिक्री को काफी हद तक कम कर दिया।

Fiat Premier Padmini: एक ब्लॉकबस्टर कार

भारत में Fiat की पहली कार ही एक ब्लॉकबस्टर रही। यह तब तक पसंद की गई, जब तक इसके विकल्प के रूप में एक बिल्कुल नए 800cc हैचबैक मॉडल को नहीं उतारा गया। यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह हैचबैक 1980 में लाई गई थी और तब तक फिएट पद्मिनी का जादू बरकरार था। खास बात है कि पद्मिनी का नाम सरकार के कहने पर रखा गया था और कार को पद्मिनी नाम चित्तौड़ की रानी को श्रद्धांजलि के रूप में दिया गया था। उस समय कार की कीमत 30,000 रुपये थी, जिसमें 1.1-लीटर पेट्रोल इंजन था, जो 40bhp पीक पावर जनरेट करता था।

Fiat पद्मिनी का जादू भारतीय इतिहास में इस हद तक भी देख सकते हैं कि आज जो मुंबई की सड़कों में काली और पीले रंग की टैक्सी दिखाई जाती है, वह और कोई नहीं फिएट पद्मिनी ही है। इस कार ने 60 के दशक के अंत में मुंबई टैक्सी बाजार में प्रवेश किया था और फिर मुंबई के इतिहास का हिस्सा बन गई।

Fiat कार के मॉडल्स

मॉडल्स की बात करें तो करीब 24 मॉडल्स है, जिन्होंने भारत में अपने कदम रखे। इसमें पद्मिनी, फिएट 500, पैलिओ, पैलिओ एडवेंचर, लिनिया, पुन्टो, फिएट अवेंचुरा, अवेंचुरा अर्बन क्रॉस, डुकाटो, ग्रैंड पुन्टो और फिएट मिलिसेंटो जैसे बहुत से मॉडल्स थे।

भारत में क्यों नहीं बरकरार रहा Fiat का जादू

भारत में ज्यादा समय तक फिएट के नहीं चलने के पीछे बहुत से कारण जिम्मेदार रहें, लेकिन सबसे मुख्य वजहें  थी-

फिएट की साझेदारी का न चलना- फिएट ने भारत में अपने यूनो को PAL के साथ साझेदारी के तहत लॉन्च किया था और इस मॉडल को जबरदस्त रिस्पॉन्स भी मिला था, लेकिन प्लांट में श्रमिक मुद्दों के कारण कार निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ और ब्रांड की बहुत बदनामी हुई। बाद में फिएट ने टाटा मोटर्स एक साथ साझेदारी की और टाटा डीलरशिप से अपनी कारों को बेचा। हालांकि, यह भी उतनी सफल साबित नहीं हुई और फिएट का जादू कम होने लगा।

गाड़ियों का एवरेज परफॉर्मेंस- समय के साथ भारतीय बाजार में ज्यादा पावरफुल मॉडलों की एंट्री शुरू हो गई। वहीं, उसी समय फिएट की कारें इस सेगमेंट में काफी पीछे थीं। मारुति, हुंडई, टाटा जैसी बहुत-सी कंपनियां ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट कारें बना रही थीं। इससे ज्यादातर ग्राहकों का ध्यान दूसरे ब्रांड्स पर जाने लगा।

पुराने मॉडल्स का दोहराव - एक समय आ गया, जब यह लगने लगा कि फिएट ने बाजार की जरूरतों की ठीक से नहीं पहचाना है। पैलिओ, सिएना, एडवेंचर, पेट्रा, पुन्टो और लिनिया सभी ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन कुल मिलाकर ग्राहकों को जल्दी ही ये कारें पुरानी लगने लगीं। ऐसा होने की वजह थी। इन कारों में कम सुविधाएं थीं।

एक दौर ऐसा भी आया कि कंपनी ने सिर्फ 743 कारें बेचीं और घाटे को देखते हुए भारत में कारों की बिक्री पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया गया। भारत में अभी कोई Fiat कार नहीं बिक रही है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अंतिम उत्पाद के रूप में भी Punto और Linea जैसी कारों ने निश्चित रूप से लोगों के दिलों में जगह बनाई।

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Edited By: Sonali Singh

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