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    जानें भारतीय कारों के लिए क्यों जरूरी है टायर प्रेशर मॉनीटरिंग सिस्टम

    By Vineet SinghEdited By:
    Updated: Tue, 06 Jul 2021 03:11 PM (IST)

    कार के टायर में किसी तरह की दिक्कत आती है इसके बारे में ड्राइवर को तब नहीं पता चलता है जब तक कि ड्राइवर खुद कार से उतरकर टायर की पोजीशन ना चेक कर ले हालांकि कार के टायर को मैनुअली चेक करने में टायर खराब हो जाता है

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    जानें भारतीय कारों के लिए क्यों जरूरी है टायर प्रेशर मॉनीटरिंग

    नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। भारत में जितनी भी प्रीमियम कारें मौजूद हैं उन सभी में से ज्यादातर में जब भी कार के टायर में किसी तरह की दिक्कत आती है इसके बारे में ड्राइवर को तब नहीं पता चलता है जब तक कि ड्राइवर खुद कार से उतरकर टायर की पोजीशन ना चेक कर ले, हालांकि कार के टायर को मैनुअली चेक करने में कई बार टायर खराब हो जाता है, पंक्चर हो जाता है या बर्स्ट हो जाता है। ये समस्या ना हो इसके लिए मार्केट में मौजूद कुछ कारों में TPM यानी टायर प्रेशर मॉनीटरिंग सिस्टम ऑफर किया जाता है जो पहले ही बता देता है कि कार का टायर पंक्चर हो सकता है या इसमें एयर प्रेशर तेजी से डाउन हो रहा है।

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    ऐसे करता है काम

    टायर प्रेशर मॉनीटरिंग सिस्टम सेंसर की मदद से काम करता है और इसका डिस्प्ले कार के केबिन में होता है। सेंसर हर टायर के लिए इंडीविजुअल होते हैं जिसका मतलब ये है कि कार के हर कार के टायर की रिपोर्ट इस सिस्टम के पास होती है जिससे हर टायर पर नजर बनी रहती है और इनमें किसी तरह की दिक्कत होने से पहले ही ड्राइवर को पता चल जाता है और वो अलर्ट हो जाता है और कार के टायर को पहले ही ठीक करवा सकता है।

    क्यों है जरूरी

    टायर प्रेशर मॉनीटरिंग सिस्टम कार को एक्सीडेंट से बचाता है। दरअसल कई बार कार जब तेज रफ़्तार में होती है और टायर फट जाता है या पंक्चर हो जाता है तो ऐसे में कार के डिस्बैलेंस होने की पूरी संभावना बनी रहती है जिससे आप एक्सीडेंट का शिकार हो सकते हैं। अगर आप कार चलाते हैं तो आपको भी इसके बारे में अच्छी तरह से पता होगा कि तेज रफ्तार में कार पंक्चर होना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

    इन कारों में मिलता है TPM

    टायर प्रेशर मॉनीटरिंग सिस्टम अभी एंट्री लेवल कारों में ऑफर नहीं किया जाता है। फिलहाल कंपनी की तरफ से ये एक ख़ास रेंज और सेगमेंट की कारों में ही ऑफर किया जाता है और इसके पीछे वजह ये है कि इसकी वजह से कार की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में कार निर्माता कंपनियां एंट्री लेवल कारों की लागत कम रखने के लिए उसमें ये फीचर नहीं ऑफर करती हैं। इस सिस्टम को कार में आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज के तौर पर भी असेम्बल करवाया जा सकता है।